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महिला

कमजोर है याददाश्त तो चलाइये साईकल

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भूलने की बीमारी का कारण हर बार बुढ़ापा ही नहीं होता, कभी-कभी व्यायाम की कमी से भी ऐसा हो सकता है. अगर आपको भी भूलने की बीमारी डीमेंसिआ की शिकायत है तो रचना प्रियदर्शनी का यह आलेख अवश्य पढ़ें ........

कचरे का करिश्मा

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घर में निकलने वाले गीले कचरे से घर में ही कम्पोस्ट बनाई जा सकती है| इससे न केवल घरेलू कचरे की समस्या दूर हो जाएगी, बल्कि बड़े पैमाने पर करें तो लाभ भी होगा|..

मातेश्वरी

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मां मैं आपको समझना चाहती हूं, आपके मन की बातें सुनना चाहती हूं, जीवन की वे हिदायतें सुनना चाहती हूं जो हम सब भाई बहनों को देती थीं. मुझसे पहले की तरह घर का काम करवाओ, डांटो, तरस गई तुम्हारी डांट खाने के लिये, प्लीज मां. ’..

मेरी बुआ विदुषी गिरिजा देवी

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गिरिजा देवी को भले ही ठुमरी साम्राज्ञी और ठुमरी की रानी मात्र कहा गया, लेकिन वे छंद-प्रबंध, ध्रुवपद धमार, ख्याल, तराना, ठुमरी, दादरा टप्पा, कजरी, चैती, होली, झूला और भजन आदि जैसी दर्जनों गान विधाओं की कंठसिद्ध गायिका थीं। डॉक्टरों के मना करने पर भी वे गाती रहीं... लोगों को हंसाती रहीं... रूलाती लुभाती और मनाती रहीं... और फिर गहरी नींद में सो गईं...फिर कभी न खुलने वाली नींद में... विदुषी गिरिजादेवी २४ अक्टूबर की रात जिस समय अपने जीवन की अंतिम सांसें ले रहीं थीं, लगभग उसी समय दिल्ली के एक सभागार ..

सऊदी अरब के कथित ‘आदर्श’ की हकीकत

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सऊदी अरब जैसे कट्टर वहाबी देश के युवराज अब कह रहे हैं कि वे उदारवाद की ओर लौटना चाहते हैं। इसके नमूने के तौर पर वे महिलाओं को वाहन चलाने की अनुमति देने की बात पेश करते हैं। इसकी दुनियाभर में खूब चर्चा भी हुई। लेकिन असलियत कुछ और ही बयान करती है। सऊदी अरब के युवराज ने हाल ही में कहा है कि ‘वे पुन: उदारवाद की ओर जाना चाहते हैं।’ सऊदी ही मुसलमानों का उद्गम स्थान है। वहां की परंपराएं, प्रथाएं तमाम मुस्लिम समाज के लिए आदर्श मानी जाती हैं। परंतु आज भी महिलाओं तथा अन्य सम्प्रदायों के लिए ..

बदलता हुआ शॉपिंग ट्रेंड

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ऑनलाइन शॉपिंग आज की दौड़ती जिंदगी की एक जरूरत बन गई है| इसके कई फायदे और कुछ नुकसान भी हैं, लेकिन यदि सावधानी बरती जाए, तो यह एक सुखद अनुभव भी हो सकता है| अत: सावधान रहें और खरीदारी का खूब आनंद लें| कल ही मेरी एक सहेली का फोन आया| कह रही थी, ‘क्या बात है बड़े दिन हुए हम गंजीपुरा नहीं गए खरीददारी करने, कब चलोगी?’ मैंने कहा, ‘हां भई दिवाली है अब तो जाना बनता ही है, चलो दो तीन दिन में हो आते हैं’ और हमने फोन रख दिया| लेकिन फोन रखने के बाद मैं सोच में पड़ गई| कुछ साल पूर्व हर ..

ध्येयनिष्ठ वंदनीय उषाताई

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वं. उषाताई चाटी का चले जाना यूं भी सेविकाओं के लिए किसी आघात से कम नहीं। वह बालिका के रूप में स्व. नानी कोलते जी की अंगुली पकड़ कर समिति की शाखा में आई और अपनी स्वभावगत विशेषताओं और क्षमताओं के कारण ६८ वर्ष पश्चात् संगठन की प्रमुख बन कर १२ वर्ष तक सभी का मार्गदर्शन करती रही। वं. मौसी जी ने सेविकाओं के सम्मुख तीन आदर्श रखे, मातृत्व-कतृत्व-नेतृत्व।वं. उषाताई जी ने ‘स्वधर्मे स्वमार्गे परं श्रद्धया’ पर चलने वाला जीवन जीया। उनका स्मरण अर्थात् ७८ वर्ष के ध्येयनिष्ठ जीवन का स्मरण। आयु के १२हवें ..