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सामाजिक

समस्त महाजन के गिरीशभाई शाह के भतीजे मोक्षेश दीक्षा लेंगे

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समस्त महाजन के गिरीशभाई शाह के भतीजे मोक्षेश दीक्षा लेंगे..

कश्मीर में बाढ़ के समय सहयोग

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कश्मीर के कुछ लोग,अलगाववादी तथा पड़ोसी पाकिस्तान क्या सोचता है? इन सबसे ऊपर उठकर समस्त भारतवर्ष के करोड़ों हाथ सेवा कार्य हेतु उठ गये| विभिन्न प्रांतों की सरकारों ने भी अपने अपने स्तर पर कश्मीर को नगद एवं वस्तुओं के रूप में सहायता भेजी| विभिन्न सेवाभावी संस्थाओं से सीधे वहां पंहुचकर या वहां की स्थानीय संस्थाओं के मिलकर राहत कार्य शरू कर दी| यह अलग बात है कि कुछ अलगाववादी नेताओं ने सरकारी सहायता या अन्य समाजसेवा संस्था की सहायता से भरी नावों को छीनकर उन्हें अपनी सहायता बताने का ढोंग रचा|..

स्वच्छता का महत्व तब और अब

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बात चाहे नदियों के संरक्षण की हो, पर्यावरण की हो अथवा बरसात के पानी से अशुद्धियां निकाल कर जल आपूर्ति की, इन सब में आधुनिक भारत प्राचीन भारत से बहुत कुछ सीख सकता है|..

सभी मावल्यांग से सबक लें

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: भारत-बांग्लादेश की सीमा के करीब बसा मेघालय का मावल्यांग गांव भारत ही नहीं, एशिया का सब से स्वच्छ गांव माना जाता है| देश के अन्य गांव भी इससे सबक लें तो गांवों में गंदगी का वर्तमान साम्राज्य ही खत्म होगा और तब भारत स्वच्छ होने में देर नहीं लगेगी|..

स्वच्छ भारत: अभियान नहीं, आदत बने

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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी भारत स्वच्छ चाहते हैं| आप और हमें भी चाहिए| लेकिन घर के सामने आने वाली कचरा गाड़ी में कचरे की थैली डालने के अलावा और कुछ करने की हमारी इच्छा नहीं होती, न हम कुछ करने को तैयार होते हैं| यदि ऐसा ही रहे तो कैसा होगा भारत स्वच्छ? जनता जब तक आंतरिक मन से कार्योन्मुख नहीं होती तब तक यह सपना अधूरा ही रहेगा|..

मोदी युग में पर्यावरण संरक्षण

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मोदी सरकार ग्रीन क्लीयरेंस, वनारोपण, स्वछता अभियान एवं गंगा सफाई पर पिछली सरकारों से काफी बेहतर काम कर रही है| औद्योगिकी प्रदूषण का मानकीकरण व उसकी निगरानी पहले से बेहतर हुई है| वर्ष २०१९ तक हर गांव, शहर, कस्बे को साफ रखना, टॉयलेट बनवाना, पीने के पानी की व्यवस्था तथा कचरा निस्तारण की व्यवस्था करना आदि का लक्ष्य रखा है|..

शुचिता चिंतन

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अंतरात्मा की प्रेरणा का सबब कही जा सकने वाली स्वच्छ जीवन पद्धतियों का अनुसरण व मार्गदर्शन प्राप्त करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत रहना ही सफल मानव जीवन का भाव है| जीवन के हर क्षेत्र में शुचिता के बिना यह संभव नहीं है|..

स्वच्छता में निवेश का अर्थशास्त्र

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स्वच्छ भारत मिशन के स्वच्छाग्रह ने राष्ट्र की कल्पना को ठीक उसी तरह आकृष्ट किया है, जिस तरह दशकों पहले महात्मा के सत्याग्रह ने किया होगा| यह तेजी से एक जनांदोलन का रूप ले रहा है| अब हमारी बारी है कि अपना कर्तव्य निभाएं|..

अपंग कल्याणकारी संस्था वानवडी पुणे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश

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अपंग कल्याणकारी संस्था वानवडी पुणे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश..

बाढ़ और सूखे की चपेट में देश

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वैसे, धरती के गर्म और ठंडी होते रहने का क्रम उसकी प्रकृति का हिस्सा है. इसका प्रभाव पूरे जैवमंडल पर पड़ता है, जिससे जैविक विविधता का अस्तित्व बना रहता है. लेकिन कुछ वर्षों से पृथ्वी के तापमान में वृद्धि की रफ्तार बहुत तेज हुई है. इससे वायुमंडल का संतुलन बिगड़ रहा है. यह स्थिति प्रकृति में अतिरिक्त मानवीय दखल से पैदा हो रही है. इसलिए इस पर नियंत्रण संभव है...

‘‘समस्त महाजन’’-सेवा कार्य

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जन सेवा कार्य को मूल उद्देश्य मानने वाली समस्त महाजन संस्था ने समय-समय पर राष्ट्र पर आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के समय महती योगदान दिया है. अगले १२ महीनों तक लगातार प्रत्येक अंक में उनके प्रमुख कार्यों का शाब्दिक विवेचन करने के क्रम के इस प्रथम भाग में संस्था के अध्यक्ष गिरीश भाई शहा ने हिंदी विवेक को महाराष्ट्र में हुए अकाल के समय किए गए कार्यों की चर्चा की. प्रस्तुत है उसका शाब्दिक अंकन....

युवाओं के संदर्भ में भविष्य चिंतन

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आज भारत में ५० प्रतिशत आबादी २५ से कम आयु की, और ६५ प्रतिशत जनसंख्या ३५ से कम उम्र की है. यह महाशक्ति है, लेकिन इस शक्ति को भारत कैसा मोड़ देता है इस पर ही सब कुछ निर्भर करेगा. ..

बिगड़ रही है नदियों की सेहत

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वडंबना है कि विकास की बुलंदियों की ओर उछलते देश में अमृत बांटने वाली नदियां आज खुद जहर पीने को अभिशप्त हैं. इसके बावजूद देश की नदियों को प्रदूषण-मुक्त करने की नीतियां महज नारों से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं...

विवेकानंद की दृष्टि में आदर्श युवा

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भारत के युवाओं को स्वामी विवेकानंद ने उस गुलामी के कालखंड में जो संदेश दिया था, वह आज भी समीचीन है. स्वामीजी युवाओं से कहते थे, ‘‘उठो, जागो, रुको मत, जब तक मंजिल पर ना पहुंचो तब तक चलते जाओ.’’ वे ऐसे युवाओं की कल्पना करते थे जो धर्माचरण करनेवाला हो, परिश्रमी हो, बलवान हो, ज्ञानवान हो और देशभक्त हो...

नौकरशाही में उलझे प्रदूषण के नियम

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केंद्र सरकार ने २०१५ के कड़े प्रदूषण नियमों को बदल कर उनमें ढील दे दी है. यह तो प्रदूषण पर आगे बढ़ने के बजाय पीछे लौटना हुआ. अतः २०१७ में संशोधित नियमावली को कचरे के डिब्बे में डाल कर २०१५ के मानकों को ही आदर्श के रूप में स्थापित कर उनका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए...

‘माय होम इंडिया’ का पूर्वोत्तर में अलख

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पूर्वोत्तर में, विशेष रूप से त्रिपुरा में, आई राजनीतिक बयार ने वहां भाजपा और राष्ट्रवादी विचारों को बल प्रदान करने वाला माहौल पैदा किया है. केंद्र में श्री नरेंद्र मोदी की नई सरकार आने के बाद वहां लोगों का आत्मविश्वास बढ़ा है. प्रस्तुत है, त्रिपुरा की जमीनी हकीकत और समग्र पूर्वोत्तर के लिए समर्पित रूप से काम कर रही ‘माय होम इंडिया’ के श्री सुनील देवधर से हुई विशेष बातचीत के महत्वपूर्ण अंशः..

एकीकरण की युवा भावना

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जम्मू और लद्दाख के साथ-साथ अब कश्मीर घाटी में भी कोई युवा अलगाववाद का सर्मथन करता नहीं मिल रहा है. घाटी में भी केवल तीन जिलों में ही देशद्रोहियों का प्रभाव है. उन्हें अब तो पैसे देकर भी पत्थरबाज नहीं मिल रहे हैं. देश की एकता के लिए राज्य का युवा पहले भी बलिदान दे चुका है और आज भी दे रहा है. युवा मन तो अपने देश भारत के साथ है, उसकी अखण्डता के लिए है..

कैसे बनाएं बच्चों को विनम्र और उदार

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आजकल की व्यस्त जीवनशैली में अभिभावक बच्चों को समय नहीं दे पाते| ऐसे में यह चाह रखना कि बच्चे को अच्छी आदतें लगे, वह विनम्र और उदार बने बहुत मुश्किल काम लगता है| नीचे दी गई टिप्स अपनाकर आप बच्चो को ऐसा बना सकते हैं| बस थोड़ा सा धैर्य रखना होगा|   * जब बच्चा बोलने और समझने लगता है, तभी से शुरआत करें|  * बच्चे ज्यादातर बातें दूसरों से सीखते हैं और वैसा ही करते हैं| इसलिए पहले खुद को आदर्श बनाएं| यदि आपका व्यवहार प्यार भरा और नम्र होगा, तो बच्चे आक्रमक हो नहीं सकते|  * बच्चे हर समय ..

राजनीतिक अभियान के साथ-साथ सामाजिक समर्थन की भी है दरकार

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गत 2 अक्टूबर, 2017 को जब से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के खिलाफ सामाजिक आंदोलन का बिगुल फूंका है, तब से एक बार फिर ये दोनों ही मुद्दे देश भर के अहम चर्चाओं के मु्द्दों में शामिल हो गये हैं. एक बार फिर से चर्चाओं और विश्लेषण का बाजार गर्म हो गया है कि आखिर तमाम तरह के कानून बनने और जन-जागरूक अभियान चलाये जाने के बावजूद आजादी के 70 वर्षों बाद भी हमारे समाज से ये दोनों कुरीतियां आखिर क्यों खत्म होने का नाम नहीं ले रही. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, भारत बाल विवाह ..

समस्त महाजन - जीवदयाप्रेमियों का सम्मलेन

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समस्त महाजन - जीवदयाप्रेमियों का सम्मलेन..

समाज को समर्पित समस्त महाजन

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‘समस्त महाजन’ केवल जीवदया को ही समर्पित नहीं है, वह मूल्यों पर आधारित शिक्षा तथा विपदा की स्थिति में फंसे मानव की सेवा को भी समर्पित है। इसलिए जल, जंगल, जानवर और जमीन इन चार बातों के संवर्धन के लिए कार्य करना हमारा मिशन है। संस्था के इन कार्यों की रूपरेखा को विशद किया संस्था के अध्यक्ष गिरीशभाई शाह ने एक विशेष भेंटवार्ता में। प्रस्तुत है उसके महत्वपूर्ण अंश-   समस्त महाजन संस्था की स्थापना का मूल उद्देश्य क्या है? संपूर्ण विश्व में कोई भी जीव भूखा न सोए और भूख की वजह से न मर ..

विवेकानंद ही युवाओं के तारणहार

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अन्ना हजारे के आंदोलन की विफलता के बाद देश के युवाओं में आई हताशा को दूर करना और उनकी उम्मीदों को सकारात्मकता से जोड़कर उन्हें राष्ट्रीय और सामाजिक कार्यों से जोड़ना बहुत आवश्यक था। इस विशाल कार्य को करने के लिए प्रेरणा देने की स्वामी विवेकानंद के विचारों में ही अद्भुत क्षमता है। इन्हीं विचारों को लेकर डॉ. राजेश सर्वज्ञ ने विवेकानंद यूथ कनेक्ट की स्थापना की। प्रस्तुत है उनकी संस्था और कार्यों के बारे में उनसे हुई बातचीत के महत्वपूर्ण अंश-   अपनी संस्था व उसके निर्माण की प्रक्रिया के बारे में ..

आओ! जीवन का विश्वास जगाएं

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अमेरिका के लास वेगास में जो नरसंहार हुआ वह सिहरन पैदा करता है| इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक का उत्तरार्द्ध हमें सचेत कर रहा है कि अब भी समय है कि हम इस भस्मासुरी प्रवृत्ति से बचें और सनातन जीवन मूल्यों को आत्मसात करते हुए विज्ञान और टेक्नालाजी से प्राप्त सुविधाओं और संपन्नता का सम्यक तथा संतुलित उपयोग और उपभोग करें| पिछले दिनों एक दिल दहला देने वाला समाचार दुनिया के सब से समृद्ध और सभ्य कहे जाने वाले देश अमेरिका से आया| वहां के एक शहर लास वेगास में एक संगीत समारोह चल रहा था| १४०००० लोग उस समारोह ..

सफाई, कचरा प्रबंधन और वैज्ञानिक ड्रेनेज

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यह एक कड़वी सच्चाई है कि स्वतंत्रता के बाद से अब तक सफाई, स्वास्थ्य, कचरे का प्रबंधन, वैज्ञानिक ड्रेनेज जैसी बातें किसी भी सरकार के एजेंडे पर या प्राथमिकता पर नहीं रहीं| न किसी केंद्र सरकार के, न किसी राज्य सरकार के| लिहाजा, केंद्र की मोदी सरकार जरूर कचरे और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है| बारिश के मौसम में हम कई खतरनाक बीमारियों को बढ़ते हुए देख रहे हैं| जैसे एंसेफेलाइटिस, डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, स्वाइन फ्लू आदि| हर साल बारिश के शुरू होते ही इनके फैलने की खबरें आने लगती हैं| साथ ही इन ..

भारत कोई धर्मशाला नहीं...

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म्यांमार से अवैध रूप से घुस आए रोहिंग्या भारतीय सुरक्षा व सामाजिक तानेबाने के लिए खतरा बने हुए हैं| इसलिए आम भारतीय मुस्लिमों को शाही इमाम जैसे नेताओं के झांसे में आकर आतंकियों के सहयोगी बन रहे रोहिंग्याइयों को भारत में बसाने की मांग नहीं करनी चाहिए व एक देशभक्त भारतीय होने का परिचय देना चाहिए| केंद्र की भाजपानीत सरकार को देश के कथित बुद्धिजीवी, सहिष्णुतावादी इस समय रोहिंग्या विषय में नए सिरे से बदनाम कर रहे हैं| रोहिंग्याइयों को शरण न देने के संदर्भ में कहा जा रहा है कि भारत की अतिथि देवो भवः ..

संवाद

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निरंतर संवाद एक मनोवैज्ञानिक चिकित्सा के समान है जो लोगों को अकेलेपन और नैराश्य से दूर रखता है| ...संवाद मानसिक संबल प्रदान करने के साथ-साथ सुरक्षा भी प्रदान करता है| इससे समाज में होने वाली कई दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है| कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखा| पति-पत्नी दोनों एक ही दफ्तर में कार्यरत हैं| दिन के लगभग ८-९ घंटे एकसाथ बिताते हैं| काम के प्रति दोनों की आस्था और दोनों का तालमेल बहुत अच्छा है| कोई भी नया प्रोजेक्ट शुरू करने के पहले एक दूसरे के विचारों को सुनना, क्या नया किया ..

गुड टच, बैड टच

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स्कूलों में छोटे बच्चों को लेकर जो घिनौनी घटनाएं सामने आ रही हैं उससे लगता है कि उन्हें इस अबोध उम्र में भी ‘गुड टच, बैड टच’ समझाने की जरूरत है| स्कूलों को यह भूमिका निभानी होगी, जबकि अभिभावकों को बच्चों की हरकतों आदि पर बारीकी से नजर रखनी होगी ताकि भविष्य के संकट को टाला जा सके|   विद्यालय में प्रद्युम्न नामक बच्चे की हत्या और पांच साल की एक बच्ची का उसके ही स्कूल में रेप!- मन विचलित हुआ न, सभी माता-पिता का? डर लगने लगा होगा| मन और आत्मा झकझोर गई होगी और इन बच्चों की जगह अपने ..

भरोसे की लक्ष्मण रेखा

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यौन शोषण के ज्यादातर मामलों में दोषी इतना नजदीकी होता है कि बच्चे की बात पर ध्यान ही नहीं दिया जाता या उसे संबंधित व्यक्ति से दूर रहने की सलाह देकर मामले की इतिश्री कर दी जाती है| इससे बच्चे कुंठित हो जाते हैं और हर जगह अपने आपको असुरक्षित मानने लगते हैं|   दुनिया भर के तमाम धर्मग्रंथों तथा वैज्ञानिक शोधों में भले ही लाख विरोधाभास दिखें पर एक बात तो सांकेतिक रूप से हर जगह से उभर कर आती है कि मनुष्य इस धरती का सब से नवीनतम प्राणी है| अगर सनातन धर्म की पुस्तकों तथा वर्तमान ज्ञात विज्ञान की ..

एकात्म मानव दर्शन की प्रासंगिकता

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भारत छोड़ो’ दिवस की ७५वीं वर्षगांठ पर हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के ही मंत्र ‘संकल्प से सिद्धि’ को अब पूर्ण योजना के रूप में अंगीकार कर, २०२२ तक मजबूत, समृृद्ध एवं समावेशी-अर्थात ‘सबका साथ, सबका विकास’- भारत के निर्माण का संकल्प ले लिया है। पं. दीनदयाल उपाध्याय जी का ‘एकात्म मानव दर्शन’, सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों ही दृष्टि से, एक सर्वकालिक एवं सार्वभौमिक जीवन दर्शन है। इस दर्शन के अनुसार, ‘मानव’ सम्पूर्ण ..

तमसो मा ज्योतिर्गमय...

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आइये, हम सब छोटे-बड़े, धनिक और गरीब सब इस दीपोत्सव में सम्मिलित हों। फिर किसी भी प्रकार के अंधकार को स्थान ही कहां रहेगा? हे भारत मां, हम सब को यही आशीष दो, कि ऐसे सात्त्विक सर्वकल्याणाकारी प्रकाश के पुंज हम बनें और दीपोत्सव सार्थ करें। हमें असत् से सत् की ओर, अंधकार से तेज-प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमरत्व की ओर, अशाश्वत से शाश्वत की ओर ले जाइये। हमारी भारतीय संस्कृति सकारात्मक है इसलिए शाश्वत, तेजयुक्त सत्य की ओर जाने की आकांक्षा, प्रार्थना, प्रेरणा हमारे जीवन की विशेषता है। प्रकाश अर्थात् खुलापन ..

वैश्विक आतंकवाद - जड़ें काटी जाएं, पत्ते नहीं

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वाद कोई भी हो, दुनिया को लाल या हरे रंग में रंगने के पीछे के पागलपन और स्वार्थों को निशाने पर लेना होगा। और कोई राह नहीं है। आवश्यकता है कि जड़ें काटी जाएं, सिर्फ पत्ते काटते जाने से कुछ नहीं होगा। ...जो इसे समझ रहे हैं, जो जाग रहे हैं उनकी ज़िम्मेदारी बहुत बड़ी है।  आतंकवाद की शुरुआत कहां से हुई कहना मुश्किल है। क्या इसकी शुरुआत ईसाई और मुस्लिम सत्ताओं के बीच एक हज़ार साल तक लड़े गए क्रूसेडों से मानी जाए, जब एक-दूसरे के शहर के शहर और गांव के गांव आग में भून डाले गए? या इसकी शुरुआत चंगेज़ खान, गोरी ..

संतोष है! खुद पर विश्वास रखने का - प्रशांत कारुलकर

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प्रशांत कारुलकर कंस्ट्रक्शन उद्योग का वह नाम है जिसने युवावस्था में ही अपनी बुद्धिमत्ता तथा ज्ञान के आधार पर व्यावसायिक बुलंदी को प्राप्त कर लिया है। अपने व्यवसाय का सम्पूर्ण ज्ञान होने के साथ-साथ प्रशांत सामाजिक संज्ञान भी रखते हैं। मृदुभाषी, सफल उद्योगपति तथा सदैव फॅशनेबल वेष परिधान करने वाले प्रशांत कारुलकर ने हिंदी विवेक से अपने व्यवसाय तथा वर्तमान सामाजिक परिस्थिति व युवाओं को मार्गदर्शन करने वाला वार्तालाप किया। प्रस्तुत है, उस वार्तालाप के कुछ अंश- जब आपने व्यवसाय शुरू किया तो आपके मन ..

मुस्लिमों में भी राष्ट्रभक्ति की उफनती लहरें हैं - इन्द्रेश कुमार

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मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के जरिए सुधारवाद का एक बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ है। मुल्ला-मौलवियों द्वारा फैलाई गई गलतफहमियों को दूर करने से लेकर तुलसी, गोरक्षा और राम मंदिर पर भी मु. रा. मंच के सलाहकार तथा मार्गदर्शक मा. श्री इन्द्रेश कुमारजी ने बेबाक खुलासा किया। प्रस्तुत है उनके साथ हुई प्रदीर्घ बातचीत के महत्वपूर्ण अंश-  वैश्विक आतंकवाद के कारण लोगों के मन में मुसलमानों के प्रति जो नफरत और भय की भावना है वह देश की एकता व सार्वभौमिकता के लिए कितनी खतरनाक है? पिछले कई वर्षों से विश्व के अनेक क्षेत्रों में ..

वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी...

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बाजार की स्पर्धा ने मां-बाप और बच्चों के बीच दूरी पैदा कर दी है। बच्चे अकेले हो गए हैं। उनका अकेलापन मोबाइल, इलेक्ट्रानिक गेम और चैनल पूरा कर रहे हैं और हताशा में वे अनायास हिंसा को अपनाने लगे हैं। तितलियां अब भी गुनगुनाती हैं, आसपास मंडराती भी हैं, कागज भी है, कश्ती भी है, बारिश भी है; लेकिन बचपन खो गया है। कैसे लौटाये उस बचपन को? अखबारों में हमेशा की तरह खबरें पढ़ रहा था। ज्यादातर बेचैनी अखबारों से भी आती है। सामने आनेवाली खबर किस प्रकार से आपको बेचैन कर दे, कह नहीं सकते। ब्लू व्हेल गेम से सम्मोहित ..

आक्रमण का नया तरीका - घुसपैठ

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घुसपैठ कई तरह की है। सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक जैसे उसके कई आयाम हो सकते हैं। इसके प्रति सरकार और जनता दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। हमारी ढिलाई भविष्य की एक बड़ी और न सुलझने वाली समस्या को न्योता दे रही है इसे नहीं भूलना चाहिए।  मानव इतिहास इस वास्तविकता का साक्षी है कि हमारे राष्ट्रीय, राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, शैक्षणिक, जीवन में उत्पन्न होने वाली समस्याओं का एकमात्र कारण घुसपैठ ही होता है। घुसपैठ का असर राष्ट्रीय, राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक व आर्थिक जीवन पर अवश्य ही पड़ता है। ..

आतंकवाद का असली चेहरा

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किसी सामान्य लाइलाज महामारी की तरह ही आतंकवाद को भी हमने आज की एक वास्तविकता समझ कर स्वीकार कर लिया है। उसका कोई उपचार या निदान निकालें, पुराने घिसे-पिटे विफल हो चुके इलाज को छोड़ कर कोई जालिम उपाय ढूंढें, यह विचार भी कभी हमारे मन में नहीं आता। आतंकवाद तो केवल एक छलावा है। उसका असली स्वामी तो मानवाधिकार है।   शब्दों में बड़ी ताकत होती है। साथ ही, शब्द बड़ा छल कर सकते हैं। किसी भी कार्य या विषय को शब्दों में लपेटते ही उसका अर्थ पूरी तरह से बदला जा सकता है। शब्दों की व्याख्या भी ऐसे ही छलावा ..

गंगा का आर्थिक योगदान

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गंगा का आर्थिक योगदान..