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सामाजिक

सफाई, कचरा प्रबंधन और वैज्ञानिक ड्रेनेज

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यह एक कड़वी सच्चाई है कि स्वतंत्रता के बाद से अब तक सफाई, स्वास्थ्य, कचरे का प्रबंधन, वैज्ञानिक ड्रेनेज जैसी बातें किसी भी सरकार के एजेंडे पर या प्राथमिकता पर नहीं रहीं| न किसी केंद्र सरकार के, न किसी राज्य सरकार के| लिहाजा, केंद्र की मोदी सरकार जरूर कचरे और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है| बारिश के मौसम में हम कई खतरनाक बीमारियों को बढ़ते हुए देख रहे हैं| जैसे एंसेफेलाइटिस, डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, स्वाइन फ्लू आदि| हर साल बारिश के शुरू होते ही इनके फैलने की खबरें आने लगती हैं| साथ ही इन ..

भारत कोई धर्मशाला नहीं...

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म्यांमार से अवैध रूप से घुस आए रोहिंग्या भारतीय सुरक्षा व सामाजिक तानेबाने के लिए खतरा बने हुए हैं| इसलिए आम भारतीय मुस्लिमों को शाही इमाम जैसे नेताओं के झांसे में आकर आतंकियों के सहयोगी बन रहे रोहिंग्याइयों को भारत में बसाने की मांग नहीं करनी चाहिए व एक देशभक्त भारतीय होने का परिचय देना चाहिए| केंद्र की भाजपानीत सरकार को देश के कथित बुद्धिजीवी, सहिष्णुतावादी इस समय रोहिंग्या विषय में नए सिरे से बदनाम कर रहे हैं| रोहिंग्याइयों को शरण न देने के संदर्भ में कहा जा रहा है कि भारत की अतिथि देवो भवः ..

संवाद

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निरंतर संवाद एक मनोवैज्ञानिक चिकित्सा के समान है जो लोगों को अकेलेपन और नैराश्य से दूर रखता है| ...संवाद मानसिक संबल प्रदान करने के साथ-साथ सुरक्षा भी प्रदान करता है| इससे समाज में होने वाली कई दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है| कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखा| पति-पत्नी दोनों एक ही दफ्तर में कार्यरत हैं| दिन के लगभग ८-९ घंटे एकसाथ बिताते हैं| काम के प्रति दोनों की आस्था और दोनों का तालमेल बहुत अच्छा है| कोई भी नया प्रोजेक्ट शुरू करने के पहले एक दूसरे के विचारों को सुनना, क्या नया किया ..

गुड टच, बैड टच

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स्कूलों में छोटे बच्चों को लेकर जो घिनौनी घटनाएं सामने आ रही हैं उससे लगता है कि उन्हें इस अबोध उम्र में भी ‘गुड टच, बैड टच’ समझाने की जरूरत है| स्कूलों को यह भूमिका निभानी होगी, जबकि अभिभावकों को बच्चों की हरकतों आदि पर बारीकी से नजर रखनी होगी ताकि भविष्य के संकट को टाला जा सके|   विद्यालय में प्रद्युम्न नामक बच्चे की हत्या और पांच साल की एक बच्ची का उसके ही स्कूल में रेप!- मन विचलित हुआ न, सभी माता-पिता का? डर लगने लगा होगा| मन और आत्मा झकझोर गई होगी और इन बच्चों की जगह अपने ..

भरोसे की लक्ष्मण रेखा

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यौन शोषण के ज्यादातर मामलों में दोषी इतना नजदीकी होता है कि बच्चे की बात पर ध्यान ही नहीं दिया जाता या उसे संबंधित व्यक्ति से दूर रहने की सलाह देकर मामले की इतिश्री कर दी जाती है| इससे बच्चे कुंठित हो जाते हैं और हर जगह अपने आपको असुरक्षित मानने लगते हैं|   दुनिया भर के तमाम धर्मग्रंथों तथा वैज्ञानिक शोधों में भले ही लाख विरोधाभास दिखें पर एक बात तो सांकेतिक रूप से हर जगह से उभर कर आती है कि मनुष्य इस धरती का सब से नवीनतम प्राणी है| अगर सनातन धर्म की पुस्तकों तथा वर्तमान ज्ञात विज्ञान की ..

एकात्म मानव दर्शन की प्रासंगिकता

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भारत छोड़ो’ दिवस की ७५वीं वर्षगांठ पर हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के ही मंत्र ‘संकल्प से सिद्धि’ को अब पूर्ण योजना के रूप में अंगीकार कर, २०२२ तक मजबूत, समृृद्ध एवं समावेशी-अर्थात ‘सबका साथ, सबका विकास’- भारत के निर्माण का संकल्प ले लिया है। पं. दीनदयाल उपाध्याय जी का ‘एकात्म मानव दर्शन’, सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों ही दृष्टि से, एक सर्वकालिक एवं सार्वभौमिक जीवन दर्शन है। इस दर्शन के अनुसार, ‘मानव’ सम्पूर्ण ..

तमसो मा ज्योतिर्गमय...

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आइये, हम सब छोटे-बड़े, धनिक और गरीब सब इस दीपोत्सव में सम्मिलित हों। फिर किसी भी प्रकार के अंधकार को स्थान ही कहां रहेगा? हे भारत मां, हम सब को यही आशीष दो, कि ऐसे सात्त्विक सर्वकल्याणाकारी प्रकाश के पुंज हम बनें और दीपोत्सव सार्थ करें। हमें असत् से सत् की ओर, अंधकार से तेज-प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमरत्व की ओर, अशाश्वत से शाश्वत की ओर ले जाइये। हमारी भारतीय संस्कृति सकारात्मक है इसलिए शाश्वत, तेजयुक्त सत्य की ओर जाने की आकांक्षा, प्रार्थना, प्रेरणा हमारे जीवन की विशेषता है। प्रकाश अर्थात् खुलापन ..

वैश्विक आतंकवाद - जड़ें काटी जाएं, पत्ते नहीं

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वाद कोई भी हो, दुनिया को लाल या हरे रंग में रंगने के पीछे के पागलपन और स्वार्थों को निशाने पर लेना होगा। और कोई राह नहीं है। आवश्यकता है कि जड़ें काटी जाएं, सिर्फ पत्ते काटते जाने से कुछ नहीं होगा। ...जो इसे समझ रहे हैं, जो जाग रहे हैं उनकी ज़िम्मेदारी बहुत बड़ी है।  आतंकवाद की शुरुआत कहां से हुई कहना मुश्किल है। क्या इसकी शुरुआत ईसाई और मुस्लिम सत्ताओं के बीच एक हज़ार साल तक लड़े गए क्रूसेडों से मानी जाए, जब एक-दूसरे के शहर के शहर और गांव के गांव आग में भून डाले गए? या इसकी शुरुआत चंगेज़ खान, गोरी ..

संतोष है! खुद पर विश्वास रखने का - प्रशांत कारुलकर

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प्रशांत कारुलकर कंस्ट्रक्शन उद्योग का वह नाम है जिसने युवावस्था में ही अपनी बुद्धिमत्ता तथा ज्ञान के आधार पर व्यावसायिक बुलंदी को प्राप्त कर लिया है। अपने व्यवसाय का सम्पूर्ण ज्ञान होने के साथ-साथ प्रशांत सामाजिक संज्ञान भी रखते हैं। मृदुभाषी, सफल उद्योगपति तथा सदैव फॅशनेबल वेष परिधान करने वाले प्रशांत कारुलकर ने हिंदी विवेक से अपने व्यवसाय तथा वर्तमान सामाजिक परिस्थिति व युवाओं को मार्गदर्शन करने वाला वार्तालाप किया। प्रस्तुत है, उस वार्तालाप के कुछ अंश- जब आपने व्यवसाय शुरू किया तो आपके मन ..

मुस्लिमों में भी राष्ट्रभक्ति की उफनती लहरें हैं - इन्द्रेश कुमार

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मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के जरिए सुधारवाद का एक बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ है। मुल्ला-मौलवियों द्वारा फैलाई गई गलतफहमियों को दूर करने से लेकर तुलसी, गोरक्षा और राम मंदिर पर भी मु. रा. मंच के सलाहकार तथा मार्गदर्शक मा. श्री इन्द्रेश कुमारजी ने बेबाक खुलासा किया। प्रस्तुत है उनके साथ हुई प्रदीर्घ बातचीत के महत्वपूर्ण अंश-  वैश्विक आतंकवाद के कारण लोगों के मन में मुसलमानों के प्रति जो नफरत और भय की भावना है वह देश की एकता व सार्वभौमिकता के लिए कितनी खतरनाक है? पिछले कई वर्षों से विश्व के अनेक क्षेत्रों में ..

वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी...

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बाजार की स्पर्धा ने मां-बाप और बच्चों के बीच दूरी पैदा कर दी है। बच्चे अकेले हो गए हैं। उनका अकेलापन मोबाइल, इलेक्ट्रानिक गेम और चैनल पूरा कर रहे हैं और हताशा में वे अनायास हिंसा को अपनाने लगे हैं। तितलियां अब भी गुनगुनाती हैं, आसपास मंडराती भी हैं, कागज भी है, कश्ती भी है, बारिश भी है; लेकिन बचपन खो गया है। कैसे लौटाये उस बचपन को? अखबारों में हमेशा की तरह खबरें पढ़ रहा था। ज्यादातर बेचैनी अखबारों से भी आती है। सामने आनेवाली खबर किस प्रकार से आपको बेचैन कर दे, कह नहीं सकते। ब्लू व्हेल गेम से सम्मोहित ..

आक्रमण का नया तरीका - घुसपैठ

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घुसपैठ कई तरह की है। सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक जैसे उसके कई आयाम हो सकते हैं। इसके प्रति सरकार और जनता दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। हमारी ढिलाई भविष्य की एक बड़ी और न सुलझने वाली समस्या को न्योता दे रही है इसे नहीं भूलना चाहिए।  मानव इतिहास इस वास्तविकता का साक्षी है कि हमारे राष्ट्रीय, राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, शैक्षणिक, जीवन में उत्पन्न होने वाली समस्याओं का एकमात्र कारण घुसपैठ ही होता है। घुसपैठ का असर राष्ट्रीय, राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक व आर्थिक जीवन पर अवश्य ही पड़ता है। ..

आतंकवाद का असली चेहरा

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किसी सामान्य लाइलाज महामारी की तरह ही आतंकवाद को भी हमने आज की एक वास्तविकता समझ कर स्वीकार कर लिया है। उसका कोई उपचार या निदान निकालें, पुराने घिसे-पिटे विफल हो चुके इलाज को छोड़ कर कोई जालिम उपाय ढूंढें, यह विचार भी कभी हमारे मन में नहीं आता। आतंकवाद तो केवल एक छलावा है। उसका असली स्वामी तो मानवाधिकार है।   शब्दों में बड़ी ताकत होती है। साथ ही, शब्द बड़ा छल कर सकते हैं। किसी भी कार्य या विषय को शब्दों में लपेटते ही उसका अर्थ पूरी तरह से बदला जा सकता है। शब्दों की व्याख्या भी ऐसे ही छलावा ..

गंगा का आर्थिक योगदान

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गंगा का आर्थिक योगदान..