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समसामयिक

इच्छा मृत्यु: मृत्यु का सम्मान

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जीवन से त्रस्त हो चुके या समृद्ध जीवन जीने के उपरांत मृत्यु की प्रतीक्षा करने वाले लोग हम अपने आस-पास देखते हैं। कई घरों में अस्सी-पचासी वर्ष के बीमार वृद्ध केवल मृत्यु नहीं होती इसलिए जीवित दिखाई देते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने व्यक्ति के जीवित रहने का व्यापक अर्थ बताते हुए इच्छा मृत्यु के संदर्भ में भले ही सशर्त मान्यता दी हो परंतु यह विषय यहीं खत्म नहीं होता।..

बैंकों की जालसाजी और अनुशासन पर्व

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पंजाब नेशनल बैंक में 13 हजार करोड़ रु. के ऐतिहासिक घोटाले का भंड़ाफोड़ होते ही लोगों का सकते में आना स्वाभाविक है। सरकारी बैंक जिस तरह से अरबों के डूबत कर्जे में फंसे हुए हैं उसे देखते हुए धोखाधड़ी का यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। तथ्य यह है कि ये कांग्रेस शासन के जमाने के कंकाल हैं, जो छिपाए नहीं छिप सकते। मोदी सरकार के जिम्मे अब सफाई का काम आ गया है। जिस तत्परता और कड़ाई से कदम उठाए जा रहे हैं उससे तो लगता है कि वित्तीय क्षेत्र में अनुशासन पर्व का आरंभ हो रहा है।..

जड़ से उखाड़ो माओवाद!

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त्रिपुरा में राजनीतिक विजय मनाते समय कम्युनिस्ट विचारधारा के मूल विध्वंसक प्रवाह को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ये उनके हार के दिन हैं, इसलिए परदे के पीछे चले गए; परंतु पूरे देश को हिंसक लाल रंग में रंग देने की उनकी व्यूहरचना को ठीक से जान लेना चाहिए और समय पर ही रोकना चाहिए। बेहतर है इस राष्ट्रविघातक विचारधारा को ही जड़ से उखाड़ दिया जाए।..

आज हमरे शान-ए-बनारस उस्ताद बिस्मिल्लाह खां साहब के जन्मदिन हौ

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इंट्रो शहनाई का पर्याय बन चुके उस्ताद बिस्मिल्ला खां साहब यदि हमारे बीच सशरीर होते तो आज १०२ साल के हो चुके होते. उनकी सादगी के तमाम किस्से मशहूर हैं. पेश है उन्हीं अनगिनत घटनाओं में से एक, उनके भारतरत्न पा जाने के बाद की ..............

अवांछित एनजीओ और सरकारी सख्ती

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अगर इन चारों की विवेचना करें तो तीनों सजीव सेवा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं| पर पुरनियों ने तीनों से ही संभल कर रहने की बात कही है| अर्थात् जीव सेवा के साथ ही साथ उन संक्रमणों से भी बचने की बात पर जोर दिया गया है जो समाज के मेरुदंड को तहस-नहस कर सकते हैं| दुनिया भर के धर्मशास्त्र व ऐतिहासिक तथा साहित्यिक रचनाकर्म बताते हैं कि मानव सेवा की परंपरा की ही तरह उसके नाम पर की जाने वाली धोखाधड़ी का इतिहास भी लगभग उतना ही पुरातन है| तमाम धार्मिक ग्रंथों में विस्तार से दिखने वाली अच्छाई व बुराई की लड़ाई वास्तव ..

सेवा का गोरखधंधा और मोदी सरकार की नकेल

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मोदी सरकार ने अवांछित कार्य में लगे स्वैच्छिक संगठनों (एनजीओ) और विदेश धन पाकर अपना उल्लू सीधा करने वालों के खिलाफ शिकंजा कसा है| कई अच्छे स्वैच्छिक संगठन हैं, जो जन-जन की सेवा में लगे हुए हैं और उन्हें प्रोत्साहन देने की जरूरत है| लेकिन, गलत काम करने वालों को कड़ाई से रोकना भी आवश्यक है|..

दीनदयाल जी की नीतियों के अनुरूप बजट

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चुनावी वर्ष के ठीक पूर्व अंतिम बजट में मोदी सरकार ने चुनावी हानि लाभ की चिंता किए बिना, अर्थव्यवस्था में सुदृढ़ता, तीव्र आर्थिक विकास की दर, वित्तीय अनुशासन तथा समाज के अधिसंख्य निर्धन एवं अक्षम वर्ग के कल्याण का बजट प्रस्तुत कर २०१९ के चुनावों के प्रति अपनी पूर्ण आश्वस्ति एंव आत्मविश्वास का भी स्पष्ट संकेत दे दिया है|..

आधुनिक ऋषि -श्री भिडे गुरुजी

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भिडे गुरुजी महाराष्ट्र में निर्माण हुआ एक अजब रसायन है| अत्यंत तीव्र स्मरण शक्ति, अचंभित करने वाली बुद्धिमत्ता, शरीर में रोमांच पैदा करने वाली वक्तृत्व शक्ति, बला की सादगी एवं ८५ वर्ष की उम्र में भी बारहों माह चौबीसों घंटे चलने वाला अथक प्रवास- इसे क्या नाम दें? केवल आधुनिक ॠषि! राष्ट्रभक्ति, धर्मभक्ति, मातृभक्ति ये आदर्श आने वाली पीढ़ियों में उत्पन्न हो इसलिए ‘श्री शिवप्रतिष्ठान हिंदुस्थान’ के जरिए उनका समाज प्रबोधन-कार्य अतुल्य है|..

भक्ति या सख्ती

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भक्ति या सख्ती..

सर्दियों में यूं बचें बीमारियों से

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हमारे शरीर का ‘रोग प्रतिकारक तंत्र’ रोगों से हमारी रक्षा करता है। यही शरीर की इम्युनिटी है। इसके लिए पोषणयुक्त आहार, पानी का पर्याप्त सेवन और अच्छी नींद आवश्यक है। समय के अनुकूल व्यायाम से अधिक लाभ होता है। इसे पढ़िए ताकि आप स्वस्थ रहें, खुश रहें। दीवाली के बाद, मौसम बदलने लगता है, सर्दियां शुरू हो जाती हैं। ऐसे बदलते मौसम में सर्दी, जुकाम, बुखार से लेकर मलेरिया जैसी बीमारियां शरीर को घेर सकती हैं। वैसे देखा जाए तो इन सबसे बचने के लिए, हमारे शरीर में एक बचाव तंत्र होता है, जो शरीर ..

चीन की पानी डकैती

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चीन तिब्बत में झांगबो (ब्रह्मपुत्र) नदी पर बांधों की शृंखला बना रहा है। अब जो नया विशालतम और बेहद खर्चीला बांध बन रहा है वह भारत-भूटान सीमा के पास तिब्बत के संगरा जिले में होगा। इस बांध का पानी उत्तर-पश्चिम में मोड़कर शिंजियांग प्रांत के तकलीमाकन रेगिस्तान तक पहुंचाया जाएगा। चीन की इस पानी डकैती का पूर्वोत्तर भारत पर गहरा असर पड़ने वाला है। भविष्य में जलयुद्ध का यह आगाज मानने में क्या हर्ज है? ‘ब्रह्मपुत्र’ नाम से हम सब परिचित हैं। उसी का तिब्बती नाम है यार्लंग झांगबो। तिब्बती में ‘झां..

वायु प्रदूषण का आपातकाल

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देश की राजधानी दिल्ली का जहरीले धुएं और धुंध से दम घुटता जा रहा है। यह केवल दिल्ली की ही नहीं, अन्य नगरों की भी समस्या है। वायु प्रदूषण कुलीन लोगों की सुविधा, लाचार किसानों की मजबूरी और कारखानों में काम कर रहे लोगों की आजीविका से जुड़ा मुद्दा भी है। इसलिए इस समस्या का हल एकांगी के बजाय बहुआयामी उपायों से ही संभव हो सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को आपातकाल की संज्ञा दी है। साथ ही दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर पूछा है कि राष्ट्रीय ..

मुजरिम सभी हैं, आज के हालात के लिए

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मुजरिम सभी हैं, आज के हालात के लिए ..

जीएसटी आम आदमी के लिए बहुत अच्छा

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विरोध करने वाले भले बदलावों को जीएसटी की अधूरी तैयारी का नाम देते रहें, लेकिन कर का पूरा ढांचा ही बदल देने वाली प्रणाली को सुचारु होने में कुछ महीने तो लगेंगे ही| दीर्घावधि में जीएसटी सब के लिए लाभप्रद ही होगा| पिछले करीब आठ महीने से देश भर में जो भी नाम सुर्खियों में रहे हैं, उनमें जीएसटी काफी आगे है| जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर आजादी के बाद का सब से बड़ा कर सुधार है, जिसे लागू करने के लिए सरकारों को बहुत मशक्कत भी करनी पड़ी है| वास्तव में यह क्रांतिकारी कदम है, इसलिए इसका जम कर समर्थन भी किया ..

नोटबंदी, जीएसटी, रेरा का महागठबंधन

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नोटबंदी, रेरा, जीएसटी को लागू करने के फैसले सही थे, लेकिन सभी फैसलों का समय गलत था या फिर समय सही था तो उसका नियोजन सही नहीं था| भारतीय इतने तीव्रता से लिए गए फैसलों के आदी नहीं है|   भाजपा ने केंद्र में अपनी सरकार २०१४ में शासित की| उसका केंद्र में आना लोगों के लिए एक नई उम्मीद की किरण थी| अच्छे दिन का वादा उनके चुनाव का मुख्य नारा था| लोग भी उनके इसी चुनाव प्रचार से प्रभावित हुए थे| आम जनता भ्रष्टाचार देख देख कर त्रस्त हो गई थी| वे ऐसे कुछ की उम्मीद लगाए थे, जिससे आतंकवाद, भ्रष्टाचार ..

जिंदगी को गाते शायर ‘हस्ती’

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हस्तीमल ‘हस्ती’ के रचनात्मक योगदान के जिक्र के बगैर पिछले चार दशक के हिन्दी गज़ल के विकास को पूरी तरह रेखांकित नहीं किया जा सकता| हस्तीजी ऐसे शायर हैं, जो सच्चाई को गुनगुनाते हैं, समय को पहचानते हैं, वर्तमान, भूत और भविष्य के आर-पार खड़े हैं| खुद चिराग बन के जल वक्त के अंधेरे में, भीख के उजालों से रोशनी नहीं होती|  उपरोक्त पंक्तियां ही बयां कर देती हैं, गज़लकार के इरादे| इरादे इतने बुलंद हैं, तभी तो हरे राम समीप अपने आलेख ‘परम्परा और आधुनिकता के सेतु गज़लकार’ में लिखते हैं ..

वैदिकी हिंसा, हिंसा न भवति

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वैसे साहित्यिक चोरी करने वाले इस तरह के कृत्य को कोई चोरी नहीं मानते, कोई अपराध नहीं मानते, कोई गलत काम नहीं मानते। इसकी बजाय वे गर्व से कहते हैं कि वैदिकी हिंसा, हिंसा न भवति यानी साहित्य की चोरी चोरी नहीं कही जाती और वे बड़े गर्व के साथ दूसरी पुस्तकों व पत्रिकाओं से अध्याय के अध्याय मारते रहते हैं। वैदिकी हिंसा, हिंसा न भवति, यानी साहित्य की चोरी चोरी नहीं कही जाती। प्रस्तुत बंदा तो संस्कृति की इस उक्ति की ज्वलंत मिसाल है, ध्वजवाहक है, अनुभवी तो इतना है कि इस क्षेत्र या इलाके यानी वैदिकी हिंसा, ..

ड्रैगन से शांति कब तक?

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चीन पूरे एशिया पर अपनी धाक बनाए रखने के लिए भारत को दूसरा फौजी सबक सिखाना चाहता है। आए दिन चीन की ओर से किसी न किसी सैनिकी कार्रवाई की खबर सुनाई देती रहती है। डोकलाम पर फिलहाल समझौता हो गया है, लेकिन यह शांति कब तक चलेगी?चीन भारत-भूटान-चीन के त्रिकोणीय जंक्शन के पास डोकलाम पर यथास्थिति को खतरनाक तरीके से बदलने पर क्यों आमादा था? सैन्य इतिहासकार इस प्रश्न के परिपे्रक्ष्य में द्वितीय भारत चीन युद्ध की आहट पा रहे हैं। इसके तमाम कारण भी हैं।  * चीनी वेस्टर्न थियेटर कमान (‘थिएटर कमान’ ..

हम चीन और पाक दोनों से एकसाथ लडने में सक्षम

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भारतीय सेना चीन और पाकिस्तान की सेनाओं से एकसाथ लड़ने में सक्षम है। डोकलाम पर चीन भले युद्ध की धमकियां दे रहा हो, लेकिन ऐसा करना उसके लिए कम से कम ८-९ माह संभव नहीं होगा। यही नहीं, अधिकतर चीनी सेना मैदानी प्रदेशों में है जिसे पहाड़ी इलाकों में लड़ने का अनुभव नहीं है। वियतनाम युद्ध में चीन की हार का एक कारण यह भी है। दूसरी ओर नागरिकों को भी चीनी माल का बहिष्कार कर युद्ध में योगदान करना होगा। पिछले कई दिनों से भारतीय और चीनी सेनाओं की एक-एक टुकड़ियां डोकलाम पठार क्षेत्र में एक दूसरे के सामने तैनात ..

भारतीय दिवालिया और ॠण शोधन अक्षमता बोर्ड

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नामचीन उद्योगपति विजय माल्या के द्वारा बैंकों का कर्ज डुबा देने के समाचार कई दिनों तक सुर्खियों में रहे। जिन बैंकों का पैसा कार्पोरेट्स में डूबा है उनके लिए सरकार ने एक नया कानून बनाया है, इससे बैंकों को एनपीए से राहत मिल सकेगी। एक बात तो सभी मानेंगे कि मा. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदीजी के नेतृत्व में भारत सरकार एक के बाद एक बड़े फैसले ले रही है। मन्शा साफ हो, इच्छाशक्ति हो और कुछ कर गुजरने का माद्दा हो तभी एक के बाद एक बड़े फैसले लिए जाते हैं। इतने बड़े-बड़े फैसले राजनैतिक नफा-नुकसान देखने वाले नहीं ..

जिजीविषा, तेरा नाम इजराइल!

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इजराइल। जीवटता, जिजीविषा और स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है। रेगिस्तान में खेती से लेकर तकनीकी, फौजी और भाषा के मामले में इजराइल ने जो मिसाल कायम की है उसका विश्व में दूसरा उदाहरण दुर्लभ है। दुनिया का छोटा तथा नवीन देश होने के बावजूद इजराईल ने हर क्षेत्र में एक मिसाल कायम की है।  इस दुनिया में मात्र दो ही देश धर्म के नाम पर अलग हुए हैं। या यूं कहे, धर्म के नाम पर नए बने हैं। वे हैं, पाकिस्तान और इजराइल। दोनों के बीच महज कुछ ही महीनों का अंतर हैं। पाकिस्तान बना १४ अगस्त, १९४७ के दिन। और इसके ठीक ..

विश्वव्यापी भारतीय संस्कृति

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सारे विश्व से जो पुरातात्विक प्रमाण मिले हैं उससे साबित होता है कि भारतीय संस्कृति विश्व के हर कोने में फैली हुई थी। चाहे जापान हो या न्यूजीलैण्ड, यूरोप हो या अफ्रीका अथवा अमेरिकी प्रायःद्वीप- हर जगह भारतीय और उनकी संस्कृति पहुंची है। हर संस्कृति से उसका मेलजोल हुआ। वह सर्वव्यापी हो गई। समुंदर पार जाने या देशांतर के दौरान संस्कृति किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती। वह सहजता और सरलता से सीमाओं को पार कर देती हैं। यहां तक कि सदियों या सहस्राब्दियों पूर्व उसने जो प्रभाव छोड़ा था वह भी सहजभाव बन जाता ..

उत्सवों का पंचामृत है दीपावली का पर्व

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अपनी बुद्धि, श्रम से अर्जित संपत्ति के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए दीप जलाए जाते हैं। यह दीप केवल बाहर प्रकाश के लिए ही नहीं बल्कि अपने अर्ंतमन को प्रकाशित करने के लिए अर्पित किए जाते हैं। इनको बिजली के बल्बों की लड़ियों से नहीं बदला जा सकता है, अतएव दीपावली घरों में तेल के दिए जला कर प्रकृति और परमेश्वर के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।   हमरे सनातन वैदिक ऋषियों ने मानवता का आह्वान करते हुए कहा, ‘‘आरोह तमसो ज्योति’’- अंधकार से प्रकाश की ओर चलो- अंधकार से प्रकाश ..