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समसामयिक

जीएसटी आम आदमी के लिए बहुत अच्छा

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विरोध करने वाले भले बदलावों को जीएसटी की अधूरी तैयारी का नाम देते रहें, लेकिन कर का पूरा ढांचा ही बदल देने वाली प्रणाली को सुचारु होने में कुछ महीने तो लगेंगे ही| दीर्घावधि में जीएसटी सब के लिए लाभप्रद ही होगा| पिछले करीब आठ महीने से देश भर में जो भी नाम सुर्खियों में रहे हैं, उनमें जीएसटी काफी आगे है| जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर आजादी के बाद का सब से बड़ा कर सुधार है, जिसे लागू करने के लिए सरकारों को बहुत मशक्कत भी करनी पड़ी है| वास्तव में यह क्रांतिकारी कदम है, इसलिए इसका जम कर समर्थन भी किया ..

नोटबंदी, जीएसटी, रेरा का महागठबंधन

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नोटबंदी, रेरा, जीएसटी को लागू करने के फैसले सही थे, लेकिन सभी फैसलों का समय गलत था या फिर समय सही था तो उसका नियोजन सही नहीं था| भारतीय इतने तीव्रता से लिए गए फैसलों के आदी नहीं है|   भाजपा ने केंद्र में अपनी सरकार २०१४ में शासित की| उसका केंद्र में आना लोगों के लिए एक नई उम्मीद की किरण थी| अच्छे दिन का वादा उनके चुनाव का मुख्य नारा था| लोग भी उनके इसी चुनाव प्रचार से प्रभावित हुए थे| आम जनता भ्रष्टाचार देख देख कर त्रस्त हो गई थी| वे ऐसे कुछ की उम्मीद लगाए थे, जिससे आतंकवाद, भ्रष्टाचार ..

जिंदगी को गाते शायर ‘हस्ती’

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हस्तीमल ‘हस्ती’ के रचनात्मक योगदान के जिक्र के बगैर पिछले चार दशक के हिन्दी गज़ल के विकास को पूरी तरह रेखांकित नहीं किया जा सकता| हस्तीजी ऐसे शायर हैं, जो सच्चाई को गुनगुनाते हैं, समय को पहचानते हैं, वर्तमान, भूत और भविष्य के आर-पार खड़े हैं| खुद चिराग बन के जल वक्त के अंधेरे में, भीख के उजालों से रोशनी नहीं होती|  उपरोक्त पंक्तियां ही बयां कर देती हैं, गज़लकार के इरादे| इरादे इतने बुलंद हैं, तभी तो हरे राम समीप अपने आलेख ‘परम्परा और आधुनिकता के सेतु गज़लकार’ में लिखते हैं ..

वैदिकी हिंसा, हिंसा न भवति

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वैसे साहित्यिक चोरी करने वाले इस तरह के कृत्य को कोई चोरी नहीं मानते, कोई अपराध नहीं मानते, कोई गलत काम नहीं मानते। इसकी बजाय वे गर्व से कहते हैं कि वैदिकी हिंसा, हिंसा न भवति यानी साहित्य की चोरी चोरी नहीं कही जाती और वे बड़े गर्व के साथ दूसरी पुस्तकों व पत्रिकाओं से अध्याय के अध्याय मारते रहते हैं। वैदिकी हिंसा, हिंसा न भवति, यानी साहित्य की चोरी चोरी नहीं कही जाती। प्रस्तुत बंदा तो संस्कृति की इस उक्ति की ज्वलंत मिसाल है, ध्वजवाहक है, अनुभवी तो इतना है कि इस क्षेत्र या इलाके यानी वैदिकी हिंसा, ..

ड्रैगन से शांति कब तक?

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चीन पूरे एशिया पर अपनी धाक बनाए रखने के लिए भारत को दूसरा फौजी सबक सिखाना चाहता है। आए दिन चीन की ओर से किसी न किसी सैनिकी कार्रवाई की खबर सुनाई देती रहती है। डोकलाम पर फिलहाल समझौता हो गया है, लेकिन यह शांति कब तक चलेगी?चीन भारत-भूटान-चीन के त्रिकोणीय जंक्शन के पास डोकलाम पर यथास्थिति को खतरनाक तरीके से बदलने पर क्यों आमादा था? सैन्य इतिहासकार इस प्रश्न के परिपे्रक्ष्य में द्वितीय भारत चीन युद्ध की आहट पा रहे हैं। इसके तमाम कारण भी हैं।  * चीनी वेस्टर्न थियेटर कमान (‘थिएटर कमान’ ..

हम चीन और पाक दोनों से एकसाथ लडने में सक्षम

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भारतीय सेना चीन और पाकिस्तान की सेनाओं से एकसाथ लड़ने में सक्षम है। डोकलाम पर चीन भले युद्ध की धमकियां दे रहा हो, लेकिन ऐसा करना उसके लिए कम से कम ८-९ माह संभव नहीं होगा। यही नहीं, अधिकतर चीनी सेना मैदानी प्रदेशों में है जिसे पहाड़ी इलाकों में लड़ने का अनुभव नहीं है। वियतनाम युद्ध में चीन की हार का एक कारण यह भी है। दूसरी ओर नागरिकों को भी चीनी माल का बहिष्कार कर युद्ध में योगदान करना होगा। पिछले कई दिनों से भारतीय और चीनी सेनाओं की एक-एक टुकड़ियां डोकलाम पठार क्षेत्र में एक दूसरे के सामने तैनात ..

भारतीय दिवालिया और ॠण शोधन अक्षमता बोर्ड

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नामचीन उद्योगपति विजय माल्या के द्वारा बैंकों का कर्ज डुबा देने के समाचार कई दिनों तक सुर्खियों में रहे। जिन बैंकों का पैसा कार्पोरेट्स में डूबा है उनके लिए सरकार ने एक नया कानून बनाया है, इससे बैंकों को एनपीए से राहत मिल सकेगी। एक बात तो सभी मानेंगे कि मा. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदीजी के नेतृत्व में भारत सरकार एक के बाद एक बड़े फैसले ले रही है। मन्शा साफ हो, इच्छाशक्ति हो और कुछ कर गुजरने का माद्दा हो तभी एक के बाद एक बड़े फैसले लिए जाते हैं। इतने बड़े-बड़े फैसले राजनैतिक नफा-नुकसान देखने वाले नहीं ..

जिजीविषा, तेरा नाम इजराइल!

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इजराइल। जीवटता, जिजीविषा और स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है। रेगिस्तान में खेती से लेकर तकनीकी, फौजी और भाषा के मामले में इजराइल ने जो मिसाल कायम की है उसका विश्व में दूसरा उदाहरण दुर्लभ है। दुनिया का छोटा तथा नवीन देश होने के बावजूद इजराईल ने हर क्षेत्र में एक मिसाल कायम की है।  इस दुनिया में मात्र दो ही देश धर्म के नाम पर अलग हुए हैं। या यूं कहे, धर्म के नाम पर नए बने हैं। वे हैं, पाकिस्तान और इजराइल। दोनों के बीच महज कुछ ही महीनों का अंतर हैं। पाकिस्तान बना १४ अगस्त, १९४७ के दिन। और इसके ठीक ..

विश्वव्यापी भारतीय संस्कृति

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सारे विश्व से जो पुरातात्विक प्रमाण मिले हैं उससे साबित होता है कि भारतीय संस्कृति विश्व के हर कोने में फैली हुई थी। चाहे जापान हो या न्यूजीलैण्ड, यूरोप हो या अफ्रीका अथवा अमेरिकी प्रायःद्वीप- हर जगह भारतीय और उनकी संस्कृति पहुंची है। हर संस्कृति से उसका मेलजोल हुआ। वह सर्वव्यापी हो गई। समुंदर पार जाने या देशांतर के दौरान संस्कृति किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती। वह सहजता और सरलता से सीमाओं को पार कर देती हैं। यहां तक कि सदियों या सहस्राब्दियों पूर्व उसने जो प्रभाव छोड़ा था वह भी सहजभाव बन जाता ..

उत्सवों का पंचामृत है दीपावली का पर्व

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अपनी बुद्धि, श्रम से अर्जित संपत्ति के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए दीप जलाए जाते हैं। यह दीप केवल बाहर प्रकाश के लिए ही नहीं बल्कि अपने अर्ंतमन को प्रकाशित करने के लिए अर्पित किए जाते हैं। इनको बिजली के बल्बों की लड़ियों से नहीं बदला जा सकता है, अतएव दीपावली घरों में तेल के दिए जला कर प्रकृति और परमेश्वर के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।   हमरे सनातन वैदिक ऋषियों ने मानवता का आह्वान करते हुए कहा, ‘‘आरोह तमसो ज्योति’’- अंधकार से प्रकाश की ओर चलो- अंधकार से प्रकाश ..