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कहानी

कागज पर हस्ताक्षर

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दोनों को देख लोग कुछ कहें इसके पहले ही गौरव बोल पड़ा, ‘आज मैं और साक्षी कोर्ट में जाकर शादी के बंधन में बंध गए| हम पति-पत्नी आप सभी को डिनर पार्टी में आमंत्रित कर रहे हैं| विश्वास है आप सभी हम लोगों को आशीर्वाद देने रीगल होटल में जरूर आएंगे|’  हाथों की मेंहदी अभी छूटने भी नहीं पाई थी कि जिसने अग्नि को साक्षी मान कर उसका हाथ थामा था, उसे राह में भटकने के लिए बीच में छोड़ कर सदा-सदा के लिए दूर चला गया| हादसे से घायल साक्षी को सभी ने धैर्य रखने की सलाह तो दी पर कोई भी उसका हम सफर बनने ..

बेस्ट फ्रेंड्स

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सचमुच हमारी ज़िन्दगी में एक सच्चा दोस्त होना बहुत आवश्यक है । दोस्ती ऐसी हो कि हमें पता है कि चाहे कोई भी परिस्थिति आ जाये, ये इंसान हमारा साथ नहीं छोड़ेगा। दोस्त तो कई होते हैं, लेकिन सच्चे अर्थों में बेस्ट फ्रेंड का कर्तव्य निभाने वाले बहुत कम होते हैं।  क्या सभी दोस्त बेस्ट फ्रेंड्स हो सकते हैं? दोस्ती के बारे में जितना कहा जाए कम है । आजकल तो व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर पर दोस्ती के संदेशों की भरमार होती है । लेकिन आख़िरकार दोस्ती होती क्या है ? हमारे दिल में कई बातें होती हैं, कई जज़्बात होते ..

बदलती परंपराओं और त्यौहारों का नया स्वाद

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आज की युवा पीढ़ी, परंपराओं के साथ भले ही हाथों में हाथ डाल कर ना चल रही हो परंतु उन्हें जिंदा रखने की हसरत उनमें है। बस उनका देखने का नजरिया बदल गया है। बदलाव और नयापन हमेशा अच्छा होता है। इससे समाज उन्नति की ओर बढ़ता है। ट्रिंग... ट्रिंग... ट्रिंग... कॉलबेल बजी। उत्साह से नेहा ने दरवाजा खोला। अपनी चारों सहेलियों को देख नेहा का चेहरा खिल उठा। ‘‘कौन आया है बेटी?’’ मां भी कमरे से बाहर आ गई। नेहा ने गांव से आई अपनी मां का सभी सहेलियों से परिचय कराया। बातचीत चल निकली तो त्यौहारों ..

बाजार के जानिब आली जनाब

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आम आदमी एक तरह से सीला हुआ बम ही तो है। भ्रष्टाचार, कुशासन, मंहगाई के शोलों में सुलगता रहता है, मगर फटता नहीं। हालांकि उसके चारों ओर की गर्मी कई बार इतनी बढ जाती है कि वह अपनी उच्चतम सीमा पर सुलगने लगता है। देखने वालों लगता है कि अब तो ये जरूर फटेगा। पर नहीं, वह तो बेचार सीला हुआ बम है। फुस्स्स्स..... पटाखे के बाजार में खड़े हैं वे। उनका नाम यहां इसलिए नहीं बताया जा रहा है कि बाजार को उनके नाम से क्या मतलब। उसके लिए अर्थ से समर्थ हर व्यक्ति एक उपभोक्ता है बस! भले ही उसका नाम दिवालिया सिंह या फकीरचंद ..

भूखे भजन न होय...

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जिंदगी हर मनुष्य का इम्तहान लेती है और किंवदंतियां बनाने वालों को भी सोचने पर मजबूर कर देती है। नहीं तो कभी भूख से मरने वाला यूनान का एक भिखारी ‘होमर’ आज वहां का राष्ट्रकवि बन जाता और भीख मांगने के दौरान गाई जाने वाली लंबी पद्यावलियों का संकलन आज विश्व की सर्वश्रेष्ठ क्लासिक रचनाओं में सर्वोपरि मानी जाती... शाम के पांच बज चुके हैं। धर्मपत्नी जी द्वारा जबरदस्ती कराए जा रहे उपवास या यूं कहूं कि प्रताड़ना की वजह से आंतें आपस में चिपक गई हैं। शरीर की समस्त इंद्रिया, जितनी भी होती होंगी ..