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कहानी

रंगविहीन....

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रंगविहीन......

गृहस्थी

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आज तनुज की बेरुखी हार गई थी और घरवालों का प्यार जीत गया था... आखिर जैसा भी है लेकिन मेरे बच्चों का पिता है वो, और गृहस्थी में तो छोटे-मोटे झगड़े चलते ही रहते हैं| इसका मतलब ये तो नहीं न कि हम रिश्तों से पलायन ही कर जाए....

दिल्ली की सैर

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‘‘तो फिर आप ये समझ लो कि जैसे पिक्चर हाल में सामने लगी स्क्रीन पर जो मूवी दिखाई देती है, वह प्रोजेक्टर से ही तो चलाते हैं. ऐसे ही प्लेनेटोरियम का जो प्रोजेक्टर होता है न बाबा, वह थोड़ा अलग तरह का होता है. उसमें सभी प्लेनेट अलग-अलग दिशाओं में घूमते हुए दिखाई देते हैं. बिल्कुल सचमुच के आसमान की तरह. बहुत आनन्द आता है बाबा, आप देखना.”..

बाल कहानी समाधान

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बाबा बाबा बचाओ की चीख सुनकर मैं कम्प्यूटर पर काम करना छोड़कर नीचे दौड़ पड़ा. सीढ़ियां उतरते उतरते मेरे दिल की धड़कन बहुत तेज हो गई थी. नीचे जाकर मैं सक्षम के पास पहुंचा तो मुझे देखते ही वह दौड़कर मुझसे चिपक गया, “बाबा बाबा मुझे बचा लो.” उसकी आंखों में भय मिश्रित निरीहता टपक रही थी और वह थर थर कांपते हुए मुझसे चिपका जा रहा था. सामने रौद्ररूप धारण किए निशा हाथ में पकड़ी डण्डी को लपलपा रही थी...

दिल को छूती गांव की कहानियां

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सोनाली जाधव हिंदी-मराठी साहित्यिक एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री गंगाधर ढोबले का ‘हरवलेलं गाव’ (गुम हो चुका गांव याने अंग्रेजी में The lost Village) मराठी कहानी संग्रह है. असल में ग्राम्य जीवन की दिल को छू लेनेवाली ये सत्यकथाएं हैं. भले काफी पहले ये कहानियां लिखी गई हों लेकिन वे आज भी उतनी ही तरोताजा है, आज भी अत्यंत जीवंत लगती हैं. सच है कि कहानी हमेशा ताजा होती है, कभी बासी नहीं होती. हालांकि लेखक का बचपन का वह गांव अब नहीं रहा; बहुत बदल चुका है. इस तरह वह गांव गुम हो चुका है; परंतु परिवर्तित गांव में ..

समाधान

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बाबा बाबा बचाओ की चीख सुनकर मैं कम्प्यूटर पर काम करना छोड़कर नीचे दौड़ पड़ा. सीढ़ियां उतरते उतरते मेरे दिल की धड़कन बहुत तेज हो गई थी. नीचे जाकर मैं सक्षम के पास पहुंचा तो मुझे देखते ही वह दौड़कर मुझसे चिपक गया, “बाबा बाबा मुझे बचा लो.” उसकी आंखों में भय मिश्रित निरीहता टपक रही थी और वह थर थर कांपते हुए मुझसे चिपका जा रहा था. सामने रौद्ररूप धारण किए निशा हाथ में पकड़ी डण्डी को लपलपा रही थी.  क्या हुआ बेटी इस बच्चे को इस तरह क्यों पीट रही हो? क्या गलती कर दी इसने? मैंने सक्षम की मम्मी निशा ..

संघर्षों के बीच

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‘‘प्रकाश को बीच में आया देखकर मंगलसिंह समझ गए थे कि युद्ध का कमान अब पुरानी पीढ़ी से हट कर नई पीढ़ी पर आ गई है जो पुरानी पीढ़ी की स्थापित मान्यताओं को ज्यों-का-त्यों स्वीकारने को कभी तैयार नहीं होगी। बाजी भी हार चुके थे। इसलिए टकराव से अच्छा यही ..

कागज पर हस्ताक्षर

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दोनों को देख लोग कुछ कहें इसके पहले ही गौरव बोल पड़ा, ‘आज मैं और साक्षी कोर्ट में जाकर शादी के बंधन में बंध गए| हम पति-पत्नी आप सभी को डिनर पार्टी में आमंत्रित कर रहे हैं| विश्वास है आप सभी हम लोगों को आशीर्वाद देने रीगल होटल में जरूर आएंगे|’  हाथों की मेंहदी अभी छूटने भी नहीं पाई थी कि जिसने अग्नि को साक्षी मान कर उसका हाथ थामा था, उसे राह में भटकने के लिए बीच में छोड़ कर सदा-सदा के लिए दूर चला गया| हादसे से घायल साक्षी को सभी ने धैर्य रखने की सलाह तो दी पर कोई भी उसका हम सफर बनने ..

बेस्ट फ्रेंड्स

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सचमुच हमारी ज़िन्दगी में एक सच्चा दोस्त होना बहुत आवश्यक है । दोस्ती ऐसी हो कि हमें पता है कि चाहे कोई भी परिस्थिति आ जाये, ये इंसान हमारा साथ नहीं छोड़ेगा। दोस्त तो कई होते हैं, लेकिन सच्चे अर्थों में बेस्ट फ्रेंड का कर्तव्य निभाने वाले बहुत कम होते हैं।  क्या सभी दोस्त बेस्ट फ्रेंड्स हो सकते हैं? दोस्ती के बारे में जितना कहा जाए कम है । आजकल तो व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर पर दोस्ती के संदेशों की भरमार होती है । लेकिन आख़िरकार दोस्ती होती क्या है ? हमारे दिल में कई बातें होती हैं, कई जज़्बात होते ..

बदलती परंपराओं और त्यौहारों का नया स्वाद

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आज की युवा पीढ़ी, परंपराओं के साथ भले ही हाथों में हाथ डाल कर ना चल रही हो परंतु उन्हें जिंदा रखने की हसरत उनमें है। बस उनका देखने का नजरिया बदल गया है। बदलाव और नयापन हमेशा अच्छा होता है। इससे समाज उन्नति की ओर बढ़ता है। ट्रिंग... ट्रिंग... ट्रिंग... कॉलबेल बजी। उत्साह से नेहा ने दरवाजा खोला। अपनी चारों सहेलियों को देख नेहा का चेहरा खिल उठा। ‘‘कौन आया है बेटी?’’ मां भी कमरे से बाहर आ गई। नेहा ने गांव से आई अपनी मां का सभी सहेलियों से परिचय कराया। बातचीत चल निकली तो त्यौहारों ..

बाजार के जानिब आली जनाब

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आम आदमी एक तरह से सीला हुआ बम ही तो है। भ्रष्टाचार, कुशासन, मंहगाई के शोलों में सुलगता रहता है, मगर फटता नहीं। हालांकि उसके चारों ओर की गर्मी कई बार इतनी बढ जाती है कि वह अपनी उच्चतम सीमा पर सुलगने लगता है। देखने वालों लगता है कि अब तो ये जरूर फटेगा। पर नहीं, वह तो बेचार सीला हुआ बम है। फुस्स्स्स..... पटाखे के बाजार में खड़े हैं वे। उनका नाम यहां इसलिए नहीं बताया जा रहा है कि बाजार को उनके नाम से क्या मतलब। उसके लिए अर्थ से समर्थ हर व्यक्ति एक उपभोक्ता है बस! भले ही उसका नाम दिवालिया सिंह या फकीरचंद ..

भूखे भजन न होय...

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जिंदगी हर मनुष्य का इम्तहान लेती है और किंवदंतियां बनाने वालों को भी सोचने पर मजबूर कर देती है। नहीं तो कभी भूख से मरने वाला यूनान का एक भिखारी ‘होमर’ आज वहां का राष्ट्रकवि बन जाता और भीख मांगने के दौरान गाई जाने वाली लंबी पद्यावलियों का संकलन आज विश्व की सर्वश्रेष्ठ क्लासिक रचनाओं में सर्वोपरि मानी जाती... शाम के पांच बज चुके हैं। धर्मपत्नी जी द्वारा जबरदस्ती कराए जा रहे उपवास या यूं कहूं कि प्रताड़ना की वजह से आंतें आपस में चिपक गई हैं। शरीर की समस्त इंद्रिया, जितनी भी होती होंगी ..