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विज्ञान

भोजन-पानी में एल्केलाइन तत्वों की उपयोगिता

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अम्ल की अधिकता से पाचन तंत्र की समस्यायें जैसे अपचन , अमाशय में जलन , अल्सर, कब्जियत जैसी समस्या होने लगती है. रक्त में अम्ल की अधिकता के कारण हड्डियों से कैल्शियम निकल कर रक्त के pH को संतुलित करता है. जिसके परिणाम स्वरुप हड्डियों का क्षरण होने लगता है. कमजोर हड्डियां कई बिमारियों का कारण होती हैं, जैसे- जोड़ों का दर्द, कमर दर्द, आर्थराइटिस इत्यादि. शरीर में अम्ल की अधिकता स्नायुतंत्र के कार्यों को भी प्रभावित करती है. जैसे अनावश्यक थकान एवं सुस्ती महसूस करना, सर में भारीपन एवं चिडचिडापन होना. अम्ल ..

एग फ्रीजिंग तकनीक मेडिकल साइंस का वरदान होने के साथ ही कई अहम सवाल भी खड़े करता है

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एग फ्रीजिंग तकनीक मेडिकल साइंस का वरदान होने के साथ ही कई अहम सवाल भी खड़े करता है..

शरीर भी तो चुम्बक ही है !

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मानव शरीर स्वंय चुम्बक की तरह कार्य करता है. हमारा सिर चुम्बक के उत्तरी ध्रुव की तरह और दक्षिण धुव्र की भांति व्यवहार करते हैं. जब हम पृथ्वी के उत्तरी धुव्र (उत्तर दिशा) की ओर सिर करके सोते है तो दो समान ध्रुवों के आमने-सामने होने से उनमें विकर्षण पैदा होता है, जिससे मनुष्यों और जानवरों के मस्तिष्क में विद्युत प्रवाह के कारण उत्पन्न होने वाले परिवर्तन एवं भू-विद्युत चुम्बकीय शक्ति शरीरों के अवयवों की कार्य प्रणाली को दुष्प्रभावित करती है...

धरती पर जैविक विनाश की चेतावनी

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नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस जनरल में छपे शोध-पत्र ने धरती पर जैविक विनाश की चिंतनीय चेतावनी दी है. लगभग साढ़े चार अरब साल उम्र की यह धरती अब तक पांच महाविनाश देख चुकी है. इस क्रम में लाखों जीव व वनस्पितियों की प्रजातियां नष्ट हुईं. पांचवां जो कहर पृथ्वी पर बरपा था, उसने डायनासोर जैसे महाकाय प्राणी का भी अंत कर दिया था. इस शोध-पत्र में दावा किया गया है कि अब धरती छठे विनाश के दौर में प्रवेश कर चुकी है. इस का अंत भयावह होगा. क्योंकि अब धरती पर चिड़िया से लेकर जिराफ तक हजा..

आओ स्मार्ट बनें

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आधुनिक प्रौद्योगिकी ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए इस माह से ‘तंत्रज्ञान’ नाम से हम नया स्तंभ शुरू कर रहे हैं. तकनीकी जानकारी आसान कर बताने से सब का लाभ होता है. आने वाले दिन स्मार्ट तकनीक के ही हैं. शुरुआत में प्रस्तुत है स्मार्ट फोन के बारे में जानकारी...

लोहे के लिए लोहे के चने चबाते हैं मरीज

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भारत की आबादी का बड़ा हिस्सा गरीबी की रेखा से नीचे जीवन बसर करता है . फलस्वरूप पौष्टिक आहार के अभाव में रक्त की कमी या एनीमिया एक आम रोग है . यह बड़े सुनियोजित तरीके से प्रचारित किया जाता रहा है कि इस बीमारी का इलाज केवल लौह तत्वों का भक्षण है, और इसके लिए अंग्रेजी दवाएं एकमात्र जरिया हैं . लेकिन यह बात ना तो डाक्टर बताते हैं, और ना ही सरकारी एजेंसियां कि हमारी बाजार में उपलब्ध तथाकथित आयरन-दवाएं ना तो सही हैं और न कारगर . बीते एक साल में दिल्ली सहित देश के अलग अलग हिस्सों से यह खबरें लगातर आती रहीं ..

धरती पर जैविक विनाश की चेतावनी

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नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस जनरल में छपे शोध-पत्र ने धरती पर जैविक विनाश की चिंतनीय चेतावनी दी है. लगभग साढ़े चार अरब साल उम्र की यह धरती अब तक पांच महाविनाश देख चुकी है. इस क्रम में लाखों जीव व वनस्पितियों की प्रजातियां नष्ट हुईं. पांचवां जो कहर पृथ्वी पर बरपा था, उसने डायनासोर जैसे महाकाय प्राणी का भी अंत कर दिया था. इस शोध-पत्र में दावा किया गया है कि अब धरती छठे विनाश के दौर में प्रवेश कर चुकी है. इस का अंत भयावह होगा. क्योंकि अब धरती पर चिड़िया से लेकर जिराफ तक हजारों जानवरों की प्रजातियों की संख्या ..