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राजनीति

अधिनायकवादियों को अब संविधान खतरे में नजर आ रहा है

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लगातार सत्ता का उपयोग(भोग) करते रहे लोगों को संविधान खतरे में दिख रहा है. संविधान के किसी हिस्से के संसोधन को लेकर आम राय बनाने की बात हो तो तो अलग है पर जनता द्वारा चुनी किसी सरकार के खिलाफ आंदोलन करना कि उस राज्य में संविधान का गला घोंटा जा रहा है, पूरी तरह असंवैधानिक है. शरद पवार, जिग्नेश मवानी, हार्दिक पटेल समेत तमाम नेताओं की अगुआई में किये गए आंदोलन का विश्लेषण करता रमेश पतंगे का आलेख...... ..

भटकाव की राह पर दलित राजनीति

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दलित राजनीति की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि दलित आंदोलन जिस आंबेडकरवादी विचारधारा को लेकर चला क्या दलित राजनीति डॉ.आंबेडकर के उन्हीं विचारों और सिद्धांतों के रास्ते पर चली या उसकी दिशा में भटकाव दिखाई देता है? कहीं यह २०१९ के लोकसभा चुनाव में भाजपा को घेरने की रणनीति तो नहीं?..

राहुलजी, कुछ अधिक परिपक्व बनिए

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राहुल गांधी जब कांग्रेस के उपाध्यक्ष थे तब उनके बचकाने बयानों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती थी, लेकिन जैसे ही वे प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के अध्यक्ष बने उनके बयानों पर गौर करना लाजिमी हो गया है, खास कर तब जब वे विदेश में बोल रहे हो| इस संदर्भ में उनका बहरीन में किया गया भाषण गैरजिम्मेदाराना ही कहा जाएगा|..

आखिर कैसे बढ़े देश ?

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इन लोगों पर हत्या, किडनैपिंग, जबरन वसूली, रेप आदि जैसे न जाने कितने और कैसे-कैसे चार्जेज लगे हैं. ऐसे में इन्हें ‘जनप्रतिनिधि’ कहना या जनप्रतिनिधि की उपाधि से नवाजना अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मारने जैसा है. ..

ऐसे है हमारे जन प्रतिनिधि

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इन लोगों पर हत्या, किडनैपिंग, जबरन वसूली, रेप आदि जैसे न जाने कितने और कैसे-कैसे चार्जेज लगे हैं. ऐसे में इन्हें ‘जनप्रतिनिधि’ कहना या जनप्रतिनिधि की उपाधि से नवाजना अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मारने जैसा है...

प्रकाशजी, जवाब तो आप ही को खोजना होगा

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प्रकाशजी, आपकी राजनीति हो गई, ब्राह्मण द्वेष की छौंक हो गई, फडणवीस, मोदी और भागवत को गालियां देने की होली हो गई, लेकिन आपको क्या मिला? जवाब तो आप ही को खोजना है| प्रकाश आंबेडकर, जय भीम! वैसे जय भीम कहने की मुझे आदत नहीं है, मैं आपको नमस्कार कहता हूं| किंतु यदि मैं नमस्कार कहता हूं तो वह आप स्वीकार नहीं करेंगे, इसलिए जय भीम कहता हूं| ..

चिंता और चिंतन की जरूरत

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लोकतंत्र में चुनाव का विशेष महत्व है. इन चुनावों के माध्यम से जनता अपने भविष्य के सपने को पंख देने की कोशिश करती है. हाल में हुए गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनावों को इसी दृष्टि से महत्व प्राप्त हो गया था. चुनावों के दौरान हिमाचल की अपेक्षा गुजरात के चुनाव विशेष चर्चित रहे. चुनावी माहौल आरोप-प्रत्यारोपों से उफनता रहा. इसमें एक बात तीव्रता से अनुभव की जा रही थी कि गुजरात के चुनाव देश में भविष्य के राजनीतिक समीकरण बदलने वाले सिद्ध होंगे. नरेंद्र मोदी गुजरात के भूमिपुत्र हैं. इसलिए आरंभ में ऐसा लग रहा ..

देवभूमि में भाजपा के सिर सत्ता का ताज

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रविंद्र सिंह भड़वाल इंट्रो हिमाचल प्रदेश में हालांकि भाजपा को भारी बहुमत मिला है, फिर भी चुनावी परिणाम कई मायनों में हैरान करने वाले रहे. हिमाचली राजनीति के कई सियासी धुरंधर चुनावों में बुरी तरह पिट गए. भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही इस तरह के अप्रिय अनुभवों के दौर से गुजरना पड़ा...

गुजरात चुनाव भाजपा जीती, पर

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गुजरात चुनाव में प्रधान मंत्री मोदी का करिश्माई नेतृत्व और भाजपा के अध्यक्ष अमित शाही का रणनीतिक कौशल काम आया, अन्यथा कांग्रेस के नेतृत्व में विरोधियों के हुए जमावड़े का कड़ा सामना करना संभव न होता. परिणामों ने कांग्रेस में नई जान फूंक दी है, देखना है कि यह उत्साह कब तक और कितना कायम रहेगा...

हिंदी विवेक प्रकाशित‘भगवद्गीता सबके लिए’ का विमोचन‘गीता जयंती’ अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में...

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हिंदी विवेक प्रकाशित ‘भगवद्गीता सबके लिए’ का विमोचन ‘गीता जयंती’ अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में.....

परावर्तन के योद्धा- मोहन जोशी-महामंत्री, विश्व हिन्दू परिषद

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वर्ष १९८४ में विश्व हिन्दू परिषद में परावर्तन विभाग प्रारंभ कर मोहन जोशी को अखिल भारतीय प्रमुख बनाया गया. यही कार्य विश्व हिंदू परिषद में धर्मप्रसार के रूप में जाना जाता है. मोहन जी ने देश में भ्रमण कर हजारों लोगों को वापस हिन्दू धर्म में आने को प्रेरित किया. नियति ने इस कर्मठ देशभक्त और हिंदू सेवक को हमसे उठा लिया, लेकिन उनका कार्य हमेशा याद रखा जाएगा. ..

क्या राहुल होंगे कांग्रेस के तारणहार?

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राजनेता राहुल गांधी का कांग्रेस जैसी ऐतिहासिक पार्टी का अध्यक्ष बनना उसमें कितनी संजीवनी फूंकेगा यह कहना मुश्किल है. उनके समक्ष इतनी बेहिसाब चुनौतियां हैं कि उन्हें झेलने की राजनीतिक परिपक्वता उनमें कितनी है इसका आज कोई अंदाजा नहीं है. लिहाजा, इससे कांग्रेस का अस्तित्व अवश्य दांव पर लग गया है. घरानेशाही की कीमत इस रूप में चुकानी पड़ रही है...

अग्निपरीक्षा गुजरात की जनता की

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पारस्परिक अंतर्विरोधों में उलझे हार्दिक, अल्पेश, जिग्नेश जैसे लड़कों के सहारे बचकाने राहुल गुजरात की जनता से वोट मांग रहे हैं, जबकि मोदी अपने विशाल कार्यों और राज्य व राष्ट्रीय विकास के बल पर वोट चाह रहे हैं। अतः परीक्षा मोदी-शाह की नहीं, गुजरात की जनता की है। चित्र ऐसा है कि भाजपा इसमें खरी उतरेगी। भारत में राजनीति सदा चर्चा का विषय रहा है और चुनाव किसी बड़े भारतीय उत्सव जैसे हैं। भारत में जिस तरह निरंतर उत्सव चलते रहते हैं, उसी तरह यह लोकतंत्र का उत्सव याने चुनाव निरंतर होते ही रहते हैं। चुनावी ..

समस्याएं उलझी नहीं, काबू में आईं - हंसराज अहीर

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कांग्रेसी सरकारों ने कश्मीर, नकसलवाद या उत्तर पूर्व के उग्रवाद को लेकर जो समस्याएं पैदा की थीं उन्हें कम करने में हमने भारी सफलता प्राप्त की है। विश्वास रखें कि आंतरिक सुरक्षा के मामले में हम महिलाओं तथा आम नागरिकों को भयमुक्त समाज दिलाने में सफल होंगे। यह विश्वास व्यक्त किया है केंद्रीय गृह राज्यमंत्री श्री हंसराज अहीर ने एक विशेष साक्षात्कार में। प्रस्तुत है उनसे देश की राजनीति, सुरक्षा, नक्सलवाद, रोहिंग्या, घुसपैठ, चीन-पाक से रिश्तें जैसी समस्याओं पर हुई प्रदीर्घ बातचीत के चुनिंदा अंश-  देश ..

शिंजो आबे को प्रचंड बहुमत

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जापानी प्रधान मंत्री शिंजो आबे की हाल के चुनावों में प्रचंड जीत के पीछे उनकी आर्थिक नीतियां और जापान को सशक्त सैन्य बल प्रदान करने के लिए संविधान संशोधन प्रस्तावित करना है। यह इस बात का संकेत है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद अब जापानी समाज बदल चुका है। आबे की सरकार अमेरिका, जापान और भारत के बीच त्रिपक्षीय सैन्य गठबंधन की इच्छा रखती है। एशिया में यह नए युग का सूत्रपात हो सकता है। जापान के प्रधान मंत्री शिंजो आबे ने २४ अक्टूबर को संपन्न संसदीय चुनावों में प्रचंड बहुमत हासिल कर सत्ता में वापसी की ..

महाशक्तियों का शतरंज

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उत्तर कोरिया की मगरूरी वास्तव में चीन की मगरूरी है। अमेरिका तथा चीन के बीच शतरंज का एक खेल उत्तर कोरिया को प्यादा बनाकर खेला जा रहा है। उसी प्रकार चीन व भारत के बीच शतरंज का मोहरा चीन ने पाकिस्तान को बनाया है। राष्ट्रतंत्र का एक अकाट्य सिद्धांत है, यदि आप गलत जड़ों को पानी देंगे तो आपको अच्छे फल कहां से व कैसे मिलेंगे? आज कुछ राष्ट्र ऐसे हैं जो पूरे विश्व के लिए समस्या बन गए हैं। इनमें चीन, उत्तर कोरिया तथा पाकिस्तान प्रमुख हैं। पूरे विश्व में अराजकता, असुरक्षा तथा अव्यवस्था का वातावरण बन गया ..

चलो केरल! अ.भा.वि.प. का अभियान

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केरल में कम्युनिस्टों की राजनीतिक हिंसा से पीड़ित परिवारों को संबल प्रदान करने के लिए अ.भा.विद्यार्थी परिषद की ओर से आगामी ११ नवम्बर को ‘चलो केरल!’ अभियान का आयोजन किया जा रहा है| इसमें देशभर से छात्र शामिल होंगे| यह अभूतपूर्व व ऐतिहासिक होगा| प्रस्तुत है इस अभियान का विवरण और संघ स्वयंसेवकों पर माकपा के हमलों की कारण मीमांसा... हाल ही में ३ सितम्बर को जब १०.३० बजे टी.वी. पर केन्द्र में बनने वाले मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह देख रहा था, सब के परिचय में उनके जीवन की किसी बड़ी उपलब्धि ..

मर्केल की मरियल जीत

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जर्मनी में लम्बे समय बाद कट्टर दक्षिणपंथी पार्टी का उभरना और एंजेला मर्केल की पार्टी का मतदान प्रतिशत घट जाना भविष्य के बदलाव की ओर इंगित कर रहे हैं| सीरियाई शरणार्थियों को अपने यहां जगह देना मर्केल को महंगा पड़ा है| इससे जर्मनी की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है|   २४ सितंबर २०१७ को जर्मनी में संपन्न संसदीय चुनाव एक मोड़ लेकर आया है| मौजूदा चांसलर एंजेला मर्केल को लगातार चौथी बार जीत तो जरूर मिली है, लेकिन घुर दक्षिणपंथी पार्टी ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) संसद में दमदार अंदाज में पहुंची ..

२०१९ का चुनाव जीतने के लिए...

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२०१४ और २०१९ में बहुत फर्क है| भाजपा कार्यकर्ताओं को इसे समझना होगा| केवल पार्टी कार्यालय में बैठ कर यहां-वहां की बातें करना और चाय की प्यालियों पर प्यालियां समाप्त करना, इस सब से कुछ नहीं होने वाला| जनता के दर पर जाकर उनके प्रेम की चाय पीना ज्यादा आवश्यक है| इस दिवास्वप्न में न रहें कि हमारे सभी विरोधी कमजोर हैं और हमें कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं बचा है|  भारतीय जनता पार्टी को २०१९ का चुनाव जीतने के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं, यह बताने का साहस मैं नहीं करूंगा | न वह मेरा अधिकार है, न ही मैं ..

उद्योग केंद्रित नीतियों की आवश्यकता

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आर्थिक सुधारों की दृष्टि से नोटबंदी, जीएसटी, करवंचना रोकने और कैशलेस लेनदेन बढ़ाने जैसे कठोर उपाय एक ही कालखंड में आए और इससे समाज में हड़बड़ी का माहौल निर्माण हो गया| नए प्रश्न निर्माण हुए| इससे पार पाने के लिए उद्योग केंद्रित नीतियों की आवश्यकता है| औद्योगिक क्षेत्र में स्वस्थ स्पर्धा, विश्वास का माहौल और प्रशासनिक संस्कृति का निर्माण हो तो इन समस्याओं से निपटा जा सकेगा|   किसी भी समाज की सम्पन्नता में उद्योगों का महत्वपूर्ण योगदान होता है| व्यवसायी समाज की आवश्यकता को पहचान कर उसे पूरा ..

भाजपा-रजनीकांतः‘विन-विन सिच्युएशन’

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जयललिता के निधन के बाद अन्ना-द्रमुक दो गुटों में बिखर गई| इनमें से पन्नीरसेलवम का एक बड़ा गुट भाजपा के अनुकूल है| यदि वह साथ में आए तो भाजपा-रजनीकांत गठजोड़ को बहुत बल मिल सकता है| दिल्ली का समर्थन तो उन्हें होगा ही| इस तरह भाजपा-रजनीकांत ‘विन-विन सिच्युएशन’ (दोनों का लाभ, किसी की हानि नहीं) में होंगे| भाजपा के लिए रजनीकांत दक्षिणायन की सीढ़ी बन सकते हैं| तमिलनाडु की राजनीति पुनः चर्चा में है| अन्ना-द्रमुक की नेता जयललिता के निधन के बाद तमिलनाडु की राजनीति में बहुत उलटफेर हुआ है| उनके ..

धर्म और राजधर्म

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मानव सभ्यता के विकास के साथ ही धर्म और राजनीति एक-दूसरे के हाथ में हाथ डाले चल रही है। दोनों में संघर्ष भी शाश्वत है। धर्म बड़ा या राजनीति? राजनीति का माने राज्य की नीति या महज जोड़-तो़ड़ या कुटिलता? धर्म और राजधर्म का क्या अर्थ है? प्रस्तुत है विश्व भर के प्रमुख धर्मों के मुख्य सूत्रों और राजनीति पर प्रभाव का यह विहंगम अवलोकन।धर्म और राजनीति का चोली-दामन का सम्बंध है। धर्म का अर्थ महज कर्मकाण्ड नहीं है, अपितु वह नैतिकता का अधिष्ठान है। धर्म का अर्थ है आचार-व्यवहार, सदाचार की स्थापना, व्यक्ति और समाज ..