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राजनीति

मर्केल की मरियल जीत

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जर्मनी में लम्बे समय बाद कट्टर दक्षिणपंथी पार्टी का उभरना और एंजेला मर्केल की पार्टी का मतदान प्रतिशत घट जाना भविष्य के बदलाव की ओर इंगित कर रहे हैं| सीरियाई शरणार्थियों को अपने यहां जगह देना मर्केल को महंगा पड़ा है| इससे जर्मनी की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है|   २४ सितंबर २०१७ को जर्मनी में संपन्न संसदीय चुनाव एक मोड़ लेकर आया है| मौजूदा चांसलर एंजेला मर्केल को लगातार चौथी बार जीत तो जरूर मिली है, लेकिन घुर दक्षिणपंथी पार्टी ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) संसद में दमदार अंदाज में पहुंची ..

२०१९ का चुनाव जीतने के लिए...

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२०१४ और २०१९ में बहुत फर्क है| भाजपा कार्यकर्ताओं को इसे समझना होगा| केवल पार्टी कार्यालय में बैठ कर यहां-वहां की बातें करना और चाय की प्यालियों पर प्यालियां समाप्त करना, इस सब से कुछ नहीं होने वाला| जनता के दर पर जाकर उनके प्रेम की चाय पीना ज्यादा आवश्यक है| इस दिवास्वप्न में न रहें कि हमारे सभी विरोधी कमजोर हैं और हमें कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं बचा है|  भारतीय जनता पार्टी को २०१९ का चुनाव जीतने के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं, यह बताने का साहस मैं नहीं करूंगा | न वह मेरा अधिकार है, न ही मैं ..

उद्योग केंद्रित नीतियों की आवश्यकता

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आर्थिक सुधारों की दृष्टि से नोटबंदी, जीएसटी, करवंचना रोकने और कैशलेस लेनदेन बढ़ाने जैसे कठोर उपाय एक ही कालखंड में आए और इससे समाज में हड़बड़ी का माहौल निर्माण हो गया| नए प्रश्न निर्माण हुए| इससे पार पाने के लिए उद्योग केंद्रित नीतियों की आवश्यकता है| औद्योगिक क्षेत्र में स्वस्थ स्पर्धा, विश्वास का माहौल और प्रशासनिक संस्कृति का निर्माण हो तो इन समस्याओं से निपटा जा सकेगा|   किसी भी समाज की सम्पन्नता में उद्योगों का महत्वपूर्ण योगदान होता है| व्यवसायी समाज की आवश्यकता को पहचान कर उसे पूरा ..

भाजपा-रजनीकांतः‘विन-विन सिच्युएशन’

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जयललिता के निधन के बाद अन्ना-द्रमुक दो गुटों में बिखर गई| इनमें से पन्नीरसेलवम का एक बड़ा गुट भाजपा के अनुकूल है| यदि वह साथ में आए तो भाजपा-रजनीकांत गठजोड़ को बहुत बल मिल सकता है| दिल्ली का समर्थन तो उन्हें होगा ही| इस तरह भाजपा-रजनीकांत ‘विन-विन सिच्युएशन’ (दोनों का लाभ, किसी की हानि नहीं) में होंगे| भाजपा के लिए रजनीकांत दक्षिणायन की सीढ़ी बन सकते हैं| तमिलनाडु की राजनीति पुनः चर्चा में है| अन्ना-द्रमुक की नेता जयललिता के निधन के बाद तमिलनाडु की राजनीति में बहुत उलटफेर हुआ है| उनके ..

धर्म और राजधर्म

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मानव सभ्यता के विकास के साथ ही धर्म और राजनीति एक-दूसरे के हाथ में हाथ डाले चल रही है। दोनों में संघर्ष भी शाश्वत है। धर्म बड़ा या राजनीति? राजनीति का माने राज्य की नीति या महज जोड़-तो़ड़ या कुटिलता? धर्म और राजधर्म का क्या अर्थ है? प्रस्तुत है विश्व भर के प्रमुख धर्मों के मुख्य सूत्रों और राजनीति पर प्रभाव का यह विहंगम अवलोकन।धर्म और राजनीति का चोली-दामन का सम्बंध है। धर्म का अर्थ महज कर्मकाण्ड नहीं है, अपितु वह नैतिकता का अधिष्ठान है। धर्म का अर्थ है आचार-व्यवहार, सदाचार की स्थापना, व्यक्ति और समाज ..