स्थिर पूर्वोत्तर : सक्षम सामरिक भारत -सुनील देवधर
स्रोत: हिंदी विवेक          | दिंनाक:३१-मार्च-२०१८







मेहनत, योग्य नेतृत्व तथा सुयोग्य नीति ने त्रिपुरा में भाजपा को अभूतपूर्व विजयश्री दिलाई। सब साथ आ गए और विजय रथ निकला पड़। इसलिए असल में यह कम्युनिस्टों के शासन से आजीज त्रिपुरा की जनता की विजय है। अब देश कांग्रेस से ही नहीं, कम्युनिस्टों से भी मुक्त होना ही है। प्रस्तुत है त्रिपुरा विजय के शिल्पकार सुनील देवधर के साक्षात्कार के उल्लेखनीय अंश।


त्रिपुरा की विजय को आप किस दृष्टि से देखते हैं?

मार्क्सवादियों से पहली राज्य स्तरीय राजनैतिक टक्कर में भाजपा को विजय मिली है। इसलिए मैं मानता हूं कि यह विजय हमारी वैचारिक, विचारात्मक, नीतिगत लड़ाई की बहुत बड़ी विजय है। त्रिपुरा विजय के बाद यह कहा जा सकता है कि संगठन को जड़ से मजबूत कर सक्रिय आंदोलन और अनेक नए-नए प्रयोग करके असंभव से असंभव चुनाव भी जीता जा सकता है।

सम्पूर्ण भारत त्रिपुरा विजय के शिल्पकार के रूप में आपको देख रहा है। आप इस सम्बंध में क्या कहना चाहेंगे?

हम तो टीम वर्क पर विश्वास करने वाले लोग हैं। किसी एक व्यक्ति के कारण कोई चीज नहीं होती। सब लोग मिल कर जब जगन्नाथ का रथ खींचते हैं, तभी रथ आगे बढ़ता है। रथ खींचते समय कोई आगे रहता है तो कोई पीछे। लेकिन ताकत सब की समान लगी रहती है। इसलिए यह त्रिपुरा की विजय है। इसका श्रेय मैं प्रधान मंत्री मोदी जी को देता हूं। मोदी जी न होते तो त्रिपुरा की जनता को विश्वास नहीं होता कि कम्युनिस्टों को हरा कर दूसरे ऐसे किसी को लाया जा सकता है जो हमारा विकास करेगा। इसलिए त्रिपुरा की जनता ने मन बना लिया। दूसरा श्रेय संगठन को जाता है और संगठन के ‘मास्टर माईंड’ अमितभाई शाह है। ऑनलाइन सदस्यता, महासंपर्क अभियान, प्रशिक्षण ये सारी चीजें जिस तरह से उन्होंने कराईं और हमने उसका गंभीरता से पालन किया,इसलिए जीत के हकदार वे हैं। तीसरा हकदार अगर कोई है तो हमने इस राज्य में पन्ना प्रमुख नियुक्त किए थे। पन्ना प्रमुख अर्थात मतदाता सूची के साठ लोगों के पीछे एक व्यक्ति। उसका काम था पंद्रह दिनों में अपने इलाके में एक-दो चक्कर मार कर, लोगों से मिल कर उनसे चर्चा करना तथा भाजपा की तरफ उनको आकर्षित करना। 42 हजार पन्ना प्रमुखों ने यह काम किया। हमारा आंकलन था कि हम तभी जीतेंगे जब बूथ जीतेंगे क्योंकि असली लड़ाई तो बूथों पर होती है।

त्रिपुरा में भाजपा के मतों का प्रतिशत 1.5% से 51% हो गया। यह चमत्कार कैसे हुआ?

इसका मुख्य कारण है कि जनता तैयार बैठी थी सीपीएम को हटाने के लिए। वह परेशान थी। जनता को विश्वास दिलाने की जरूरत थी। जमीनी कार्य करने की जरूरत थी। विश्वास, अपार मेहनत इन दो चीजों के कारण ये संभव हुआ।

त्रिपुरा विजय में संघकार्य की दिशा और योगदान क्या रहा?

सच कहूं तोपहले संघ यहां पर बहुत कमजोर था। धीरे-धीरे संघ का कार्य खड़ा रहा। कम्युनिस्ट सरकार के संदर्भ में त्रिपुरा की जनता में जो नकारात्मक माहौल बना था उसके कारण लोग भाजपा में आने लगे। भाजपा में आने के कारण लोगों में संघ को जानने की भी उत्सुकता जागृत हुई। त्रिपुरा विजय में संघकार्य की दिशा का योगदान तो नहीं रहा परंतु जमीनी स्तर के संगठनात्मक कार्यों में संघ स्वयंसेवकों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता।

समाज की धारणा है कि भाजपा हिंदुत्ववादी विचारों से जुडी पार्टी है। ऐसे में भाजपा को अपने मतदाता निर्माण करने के लिए क्या प्रयास करने पड़े?

त्रिपुरा हिंदू-बहुल इलाका है और यहां के हिंदू-बहुल इलाकों में ही भाजपा को अपने मतदाता प्राप्त हुए; क्योंकि ये लोग वामपंथी सरकार से परेशान हो चुके थे। यहां के जो मुस्लिम-बहुल कुछ छोटे-छोटे क्षेत्र हैं वहां से हमें मत नहीं मिल सके।

त्रिपुरा में भाजपा की सरकार है? आपकी दृष्टि में अब विकास की नीति क्या होनी चाहिए?

कानून-व्यवस्था, सुराज्य और औद्योगिकीकरण के दृष्टिकोण से विकास पर विचार होना चाहिए। क्योंकि आप उद्योग तभी शुरू सकते हैं जब कानून-व्यवस्था अच्छी होगी, अगर कानून-व्यवस्था अच्छी नहीं होगी तो उद्योग नहीं चल सकेंगे। सुराज्य नहीं होगा तो भ्रष्टाचार होगा। भ्रष्टाचार होगा तो उद्योग, प्रोफेशन, कौशल विकास का कोई भी काम नहीं होगा। केंद्र सरकार सब से पहले इन्फास्ट्रकचर की रचना में रुचि रखती है। सरकार प्रयास कर रही है। मोदी जी ने कहा है त्रिपुरा को माणिक नहीं चाहिए, हीरा (कखठअ) चाहिए। हीरा (कखठअ) अर्थात् क का अर्थ हाइवे, ख का आईवे, ठ का रेलवे और अ का अर्थ एयरवे।

क्या कांग्रेस मुक्त भारत के साथ कम्युनिस्ट मुक्त भारत होना आवश्यक है? क्यों?

कांग्रेस मुक्त भारत से भी ज्यादा कम्युनिस्ट मुक्त भारत होना आवश्यक है। कांग्रेस मूलत: देशद्रोही पार्टी नहीं है। सत्ता के लालच में कई बार वे देशद्रोही बन जाते हैं, सो अलग बात है परंतु वे लोग देश को मानने वाले लोग हैं। लेकिन कम्युनिस्ट देशद्रोही लोग हैं। देश के विकास के हर काम में रोड़ा डालने वाले लोग हैं। यह विचारधारा समाप्त होनी चाहिए। इसलिए कांग्रेस मुक्त भारत से पहले कम्युनिस्ट मुक्त भारत होना ज्यादा जरूरी है।

अब एक ही कम्युनिस्टों का गढ़-केरल- बचा है। भविष्य में केरल विजय की रणनीति क्या होगी?

मेहनत, योग्य नेतृत्व तथा सुयोग्य नीति यही विजय की रणनीति होनी चाहिए।

त्रिपुरा में माइक्रो सोशल मैनेजमेंट उपयुक्त रही? उसकी सफलता के बिंदु क्या थे?

दो साल पहले से सोशल मीडिया का सक्रिय होना, अलग-अलग प्रकार के प्रमोशनल कार्यशालाओं के माध्यम से लोगों तक पहुंचना। जहां व्यक्ति के रूप में भाजपा के पहुंचने में समय लगता वहां ऑनलाइन ने हमें जल्दी पहुंचा दिया।

सामान्य स्वयंसेवक से त्रिपुरा की कम्युनिस्ट सरकार को धूल चटाने वाले सेनापति तक की आपकी यात्रा का सिंहावलोकन आप कैसे करेंगे?

मैंने अपने कार्य के दौरान यह सीखा कि बहुत ज्यादा योजना न करते हुए समय-समय पर मिलने वाले काम को ईमानदारी से करते जाओ। कर्म करते जाओ, आपको मंजिल अपने आप मिल जाएगी।

सत्ता मिलने के बाद कार्यकर्ता बिगड़ने लगते हैं, त्रिपुरा में ऐसा ना हो इसलिए आप क्या सावधानी बरतेंगे?

तीन साल में हमें कार्यकर्ताओं काबहुत अच्छा अनुभव मिला है। अब हम नया संगठन बनाएंगे। संगठन में तीन साल के अनुभव को सामने रख कर उसमें जो भी अच्छे और गुणी कार्यकर्ता हमें मिले हैं उनको हम दायित्व देंगे। संगठन की दृष्टि से प्रशिक्षण, बैठकें जैसी आवश्यक बातों का प्रचार-प्रसार करेंगे। हमें पूरा भरोसा है कि सत्ता मिलने के बाद भी हमारा संगठन सशक्त रहेगा।

इस दमदार विजय के बाद क्या आपकी इच्छा राजनीति की मुख्य धारा में आने की है?

मेरी इच्छा केवल देश की सेवा के रूप में राजनीति में काम करने की है। पार्टी जो दायित्व देगी वह मैं निष्ठा से संभालूंगा।

2014 की जीत के बाद प्रधान मंत्री मोदी जी ने पूर्वोत्तर के विकास के संदर्भ में एक नीति बनाई? क्या त्रिपुरा की विजय को उसका पहला पायदान कहा जा सकता है?

पहला पायदान नहीं कहा जा सकता; क्योंकि हमने पहले असम और मणिपुर जीता है। मणिपुर में भले ही अकेली कांग्रेस पार्टी रही होगी। लेकिन मणिपुर जैसे राज्य में 21 विधायक लेक र आना कोई आसान बात नहीं है। अरूणाचल में कांग्रेस की पूरी सरकार को भाजपा में आने की इच्छा होना उसी रणनीति का एक फल है। इसलिए त्रिपुरा की विजय पहली चुनावी विजय नहीं है परंतु पूर्वोत्तर विकास की नीति का एक हिस्सा है।

पूर्वोत्तर में होने वाले राजनैतिक परिवर्तन से भारत सामरिक दृष्टि से अधिक सक्षम कैसे होगा?

पूर्वोत्तर के सीमावर्ती इलाकों में चीन का खतरा मंड़रा रहा है। बांग्लादेश से निरंतर घुसपैठ होती है। अभी तक की सरकार ने इस ओर अधिक ध्यान नहीं दिया परंतु अब मोदी जी की नीति के कारण तथा पूर्वोत्तर में भाजपा की सरकार आने से इस सब पर अपने आप लगाम लग जाएगी और भारत सामरिक दृष्टि से अधिक सुरक्षित होगा।

कम्युनिस्टों के अभेद्य किले को भेदने का बल आप में कैसे आया?

विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करने की हिम्मत जो संघ के प्रशिक्षण में तथा नियमित संघ शाखा के कार्यक्रम में मिलती है, उसी हिम्मत ने मुझे मेघालय में भी प्रचारक के नाते काम करते समय सहयोग दिया था, प्रेरित किया था। यहां त्रिपुरा में भी काम करते समय मुझे उसी हिम्मत ने बड़ा सहयोग दिया।

अब मोदी जी की नीति के कारण तथा पूर्वोत्तर में भाजपा की सरकार के आने से भारत सामरिक दृष्टि से अधिक सुरक्षित होगा।

अभी तक दुर्लक्षित त्रिपुरा इस चुनाव के कारण देशभर की नजर में छा गया है। भविष्य में भाजपा सरकार को इसे विकास प्रदेश के रूप में सामने लाने हेतु क्या करना होगा?

‘आदर्श राज्य’ बनाना है त्रिपुरा को। त्रिपुरा की प्राकृतिक सुंदरता को पर्यटन की उपलब्धियों में परिवर्तित करना है। त्रिपुरा की उर्वरा भूमि में औषधियों तथा बागानी के माध्यम से बहुत बड़ा काम करना है। यहां बांस बहुत बड़े पैमाने पर हैं, उनको ग्रीनगोल्ड कहा जाता है। इस बात को सत्य सिद्ध करना है। एक तिहाई त्रिपुरा राज्य रबड़ से भरा है। जिसका रबड़ माफिया शोषण करते थे। अब हम वह शोषण खत्म करेंगे। रबड़ के माध्यम से त्रिपुरा में पैसा आएगा। जो अलग-अलग फल यहां उगते हैं, उनकी प्रोसेसिंग की यूनिट हर जिले में खडी की जाएगी। ऐसे कई सारे उपायों से हम लोग त्रिपुरा को कर्ज से बाहर निकालेंगे और एक आदर्श राज्य बानाकर दिखाएंगे।

भाजपा में विभिन्न पर्टियों तथा विचारप्रवाहों के लोग शामिल हुए हैं। इन्हें आप भाजपा के संगठनात्मक अनुशासन में किस तरह शामिल करेंगे?

जैसे गंगा में अलग-अलग नदियों का प्रवाह मिल जाता है। इनमें से कौन सा प्रवाह जमुना या अलग नदी का है, यह नहीं बता सकते। उसी तरह से जब वे भाजपा के नहीं थे तब उन्होंने जो कुछ गलतियां की उसका जिम्मा उस पार्टी पर है। जब हमारी पार्टी में आने के बाद वे हमारे हैं। हम हमारे लोगों को प्रशिक्षण के माध्यम से संगठन कौशल्य की अनुभूति देकर तथा राष्ट्रीय विचारों के मूल प्रवाह में लाकर अपनी पार्टी में समाहित कर लेंगे।