हायपरलूप ट्रेन
स्रोत: हिंदी विवेक          | दिंनाक:३१-मार्च-२०१८




महाराष्ट्र तथा आंध्र प्रदेश के बीच सब से तेज रफ्तार वाला हायपरलूप ट्रेन आ रही है। यह ट्रेन एक सुरंग के भीतर से चलेगी और पांच घंटे का अंतर पंद्रह मिनट में काटेगी। आंध्र प्रदेश सरकार ने इसके लिए अमेरिका स्थित हायपरलूप ट्राँस्पोर्टेशन टेक्नॉलजीस नामक कंपनी के साथ करार किया है।

मुंबई से पुणे स़िर्फ 15 मिनट में? मुंबई से दिल्ली सिर्फ एक घंटे में? कहीं यह सपना तो नहीं? अरे नहीं जनाब! यह सपना नहीं है हकीकत है। यह कमाल हो सकता है हायपरलूप ट्रेन से।

पहिए के आविष्कार के बाद यातायात ने जो क्रांति की, हम सभी उसके गवाह हैं। रथ, बैलगाड़ी, साइकिल, दोपहिया वाहन, चार पहिया वाहन, रेल, बस, हवाई जहाज आदि आदि आदि। हवाई जहाज आने के बाद से तो जैसे सारी दुनिया ही सिमट गई है। पानी पर चलने वाले जहाज से सम्बंधित सात समंदर पार वाली कहावत को हवाई जहाज ने पुराना कर दिया। परंतु अभी भी महानगरों के अंदर एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने या एक महानगर से दूसरे महानगर का अंतर तय करने में समय तो लगता ही है। लोकल ट्रेनों पर बढती भीड़ का दबाव भी एक कारण था जिसने मेट्रो और मोनो रेल को भारत में ला खड़ा किया। कहते हैं न कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। आज मुंबई तथा अन्य महानगरों का व्यक्ति और अधिक गति चाहता है। इसलिए आजकल भारत में हायपरलूप ट्रेन की बहुत चर्चा हो रही है। आइए देखते हैं क्या है यह हायपरलूप ट्रेन?

हायपरलूप ट्रेन की गति बुलेट ट्रेन से दुगनी है। इसमे वैक्यूम ट्यूब सिस्टम होता है, जिसमें से कैपसूल के आकर की ट्रेन गुजरती है। वैक्यूम ट्यूब सिस्टम से गुजरने वाली इस ट्रेन की रफ्तार 1200 किमी प्रति घंटा होती है। स्पेस एक्स नामक कंपनी ने इस हायपरलूप ट्रेन का निर्माण किया है। स्पेस एक्स एक अंतरिक्ष सफर में काम करने वाली कंपनी है। हायपरलूप ट्रेन स्पेस एक्स के मालिक एलोन मस्क का सपना था जिसे उन्होंने कड़ी मेहनत से साकार किया।

बुलेट ट्रेन तथा हायपरलूप ट्रेन में मैग्लेव तकनीक का इस्तेमाल होता है। इसमें कई सारे चुंबक लगाए जाते हैं। इन चुंबकों से यह ट्रेन पटरी पर से हवा में उठती है। हवा में उठी हुई इस ट्रेन को अगर हम जरा सा भी धक्का दें तो अवरोध न होने की वजह से यह ट्रेन भागने लगती है। मैग्लेव ट्रेन या बुलेट ट्रेन इसी तकनीक से चलती है। हायपरलूप ट्रेन में इस हवा में उठी हुई ट्रेन को धक्का तो नहीं दिया जाता पर उस ट्रेन के आगे की जगह को निर्वात बना कर उसे खींचा जाता है। जिस तरह हम वेक्युम क्लीनर से कचरा खींचते है ठीक वैसे ही इस ट्रेन को आगे खींचा जाता है। यह प्रक्रिया इतनी जबरदस्त होती है कि हवा में उठी हुई ट्रेन को सुरक्षित पर काफी ज्यादा गति मिलती है। बुलेट ट्रेन से लगभग दुगुनी गति।

पूरी दुनिया में इस हायपर लूप की जोरदार चर्चा हो रही है। पर भारत में इस ट्रेन की पहली पटरी डाली जाने वाली है। अपने देश में महाराष्ट्र तथा आंध्र प्रदेश इन 2 राज्यों में हायपरलूप बनने वाले है।

आंध्र प्रदेश सरकार ने विजयवाड़ा में मेट्रो के रुके हुए काम से तंग आकर अमेरिका स्थित हायपरलूप ट्राँस्पोर्टेशन टेक्नॉलजीस नामक कंपनी के साथ मिल कर आने वाले 5 साल के अंदर हायपरलूप ट्रेन लाने का फैसला किया है।

व्हर्जिन हायपरलूप वन नामक कंपनी के साथ महाराष्ट्र सरकार ने देश के सब से व्यस्त मार्ग मुंबई से पुणे के लिए हायपरलूप निर्माण हेतु एक करार किया है। इस करार के जरिए आने वाले 5 साल में मुंबई पुणे हायपरलूप ट्रेन का ट्रायल रन होने वाला है। जिसमें यह अंतर केवल 15 मिनिट में तय किया जाएगा और वह भी 300 यात्रियों के साथ।

लेकिन इतनी तेज गति क्या सुरक्षित है? क्या यह तकनीक पूरी तरीके से सुरक्षित है?

इनके निर्माताओं का यह दावा है कि हायपरलूप तकनीक दुनिया की सब से सुरक्षित तकनीक है। आप समतल ज़मीन पर जैसे आसानी से और सुरक्षित चल सकते हैं, उसी तरह ये हायपरलूप भी अत्यंत सुरक्षित है। इसमें लगाने वाली बिजली, बुलेट ट्रेन से बहुत कम है तथा इसके निर्माण में लगने वाले साधन भी काफी सस्ते हैं। और इतनी गति होते हुए भी यह ट्रेन आसानी से रोकी जाती है। यह ट्रेन अपनी सुरंग या ट्यूब में ही होने के कारण, इसकी गति से किसी का कुछ भी नुकसान नहीं होता। साथ ही किसी भी पल में यह ट्रेन सुरक्षित तरीके से रोकी जा सकती है। अचानक बिजली के चले जाने पर भी यह ट्रेन अपने आप रुक जाती है। सब से महत्वपूर्ण बात यह है कि इस हायपरलूप ट्रेन के निर्माण में जो पैसा लगने वाला है वह हमारे देश को लगभग बिना ब्याज के मिलेगा। हमें केवल इसके निर्माण के लिए जगह देनी है, बस...।

तो आइए, हम सब मिल कर इस हायपरलूप ट्रेन का स्वागत करें।