हिंदी विवेक मासिक पत्रिका के बढ़ते कदम
स्रोत: हिंदी विवेक       | दिंनाक:१५-अक्तूबर-२०१७

स्वतंत्रता के बाद मुंबई से साप्ताहिक विवेक का प्रकाशन (मराठी में) शुरू किया गया| विगत सडसठ सालों से विवेक के माध्यम से अनेक राष्ट्रीय, सामाजिक राजनीतिक व अन्य विषयों को समय - समय पर मुखरित किया गया है|

इसी पृष्ठभूमि पर देश भर के पाठकों, लेखकों, विचारकों और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे लोगों की मांग पर विवेक ने ‘हिंदी विवेक’ के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करने का लक्ष्य सुनिश्चित किया और आज से पांच वर्ष पूर्व ‘हिंदी विवेक’ का प्रकाशन शुरू किया गया|

हिंदी विवेक के प्रवेशांक का लोकार्पण नासिक के कालिदास सभागृह में हजारों लोगों की उपस्थिति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक पू. मोहनजी भागवत के करकमलों द्वारा २ अप्रैल, सन २०१० को किया गया| उसी समय यह निर्णय लिया गया था कि भविष्य में प्रकाशित होनेवाले हिंदी विवेक के सभी अंकों का लोकार्पण समारोह के रुप में किया जाएगा| अत: मुंबई तथा देशभर के प्रमुख शहरों में हिंदी विवेक के माह के अंक का लोकार्पण समाज के सुप्रसिद्ध विद्वानों, पत्रकारों, समाजसेवकों, राजनेताओं, उद्योगपतियों और शिक्षा सेवियों द्वारा किया गया| इन समारोहों के माध्यम से विवेक के साथ वैचारिक सामंजस्य न रखने वाले लोगों के साथ भी हिंदी विवेक के सम्बन्ध विकसित हुए| रा. स्व. संघ के सरकार्यवाह मा. भैयाजी जोशी, केंद्रीय मंत्री मा. नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री मा. देवेन्द्र फडणवीस, शिवसेना नेता व बैंकर श्री एकनाथ ठाकुर, श्री सुधीर मुनगंटीवार, श्री. मनोहर जोशी, श्री. सुब्रह्नण्यम स्वामी, श्री. कलराज मिश्र,श्री.वरूण गांधी ,सुश्री स्मृति इराणी और इस्कॉन के प्रमुख श्री. सूरदास प्रभुजी, केन्द्रीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल मा. श्री राम नाईक, महाराष्ट्र के राज्यपाल मा. के. विद्यासागर राव, रा.स्व. संघ के सह सरकार्यवाह मा. कृष्णगोपाल जी, रा.स्व. संघ के सह सरकार्यवाह मा. दत्तात्रय होसबोले आदि मान्यवरों ने हिंदी विवेक के कार्यक्रमों में उत्साहवर्धक व वैचारिक मार्गदर्शन किया| हिंदी विवेक लोकार्पण समारोहों में पाठकों को निमंत्रित करने की एक परम्परा की शुरूआत हुई, जिसका प्रसार व प्रचार में बहुत योगदान मिला|

किसी पत्र - पत्रिका को राष्ट्रीय स्वीकृति प्राप्त होने में दशक बीत जाते हैं| ‘हिंदी विवेक‘ के द्वारा उठाये गये मुद्दों और प्रस्तुत किये गये तथ्यों के कारण हमने अल्प काल में ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली| प्रकाशन शुरू होने के कुछ ही महीनों में मुंबई, ठाणे महाराष्ट्र एवं देश के अन्य भागों में हिंदी विवेक की अच्छी पहचान बन गयी| अब पांच साल होते होते महाराष्ट्र से बाहर , देश के प्रमुख शहरों में हिंदी विवेक के पाठक बन गये हैं| इन पांच वर्षों में हिंदी विवेक द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा, नक्सलवाद, भष्ट्राचार, राजनीतिक सुचिता, राजयोग, आर्थिक विश्लेषण जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों के साथ भारतीयता को प्रस्तुत करनेवाले सांस्कृतिक, सामाजिक विषयों को भी प्रस्तुत किया गया| पर्यावरण रक्षा विशेषांक, गो-रक्षा विशेषांक, हिंदी दिवस विशेषांक,दीपावली विशेषांक, अग्रवाल समाज विशेषांक, जैन तेरापंथ के आचार्य महाश्रमण विशेषांक, महिला विशेषांक, राजस्थान गौरव विशेषांक, मॉं विशेषांक, सिंधी समाज दर्शन विशेषांक, संगीत दीपावली विशेषांक ,योग विशेषांक, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर विशेषांक, गंगा विशेषांक, पूर्वोत्तर भारत विशेषांक, पूर्वांचल विशेषांक, ऊर्जावान भारत विशेषांक इत्यादि विषयों पर भी हिंदी विवेक द्वारा विशेषांक प्रकाशित किए गये|

राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति सशक्त रूप से दर्ज करने के साथ ही पहले वर्ष में ही ‘हिंदी विवेक’ ने बोरीवली के अपने नये कार्यालय में प्रवेश किया और एक साल पूरा होने से पूर्व ही मुंबई से आगे बढ़कर देश की राजधानी नई दिल्ली में भी अपना कार्यालय स्थापित किया| यह हिंदी विवेक की एक विशेष उपलब्धि रही है|

भविष्य की योजनाएं- प्रवेशांक के लोकार्पण के समय पू. सरसंघसंचालक जी ने आशीर्वाद स्वरूप कहा था कि, ‘‘ जिस प्रकार से मराठी विवेक ने समाज में अपना स्थान निर्माण किया है, उसी प्रकार से हिंदी विवेक भी अपना देशभर मे निर्माण करेगा|’मा. मोहन भागवत जी के इस कथन को ध्येय वाक्य मानकर हिंदी विवेक अनवरत् एक से एक प्रतिमान स्थापित करते हुए आगे बढ़ रहा है| दिल्ली में कार्यालय खुलने के साथ ही ‘हिंदी विवेक’ की राष्ट्रीय भूमिका तय हो गयी है| देशभर के सभी प्रमुख शहरों तक ‘हिंदी विवेक’ पहुँच रहा है| राष्ट्रीय महत्त्व के विषयों को उठाने के कारण इसकी चर्चा प्रबुद्ध वर्ग में हो रही है|

ऐसा कहा जा रहा है कि वर्तमान समय संचार माध्यमों का समय है, भविष्य में समाज व राष्ट्र निर्माण में मीडिया की महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी | अत: हिंदी विवेक अभी से अपने उद्द्ेश्यों के प्रति स्पष्ट विचार रखता है| आनेवाले समय में यह नि:सन्देह राष्ट्रीय महत्त्व के मुद्दों का संवाहक बनेगा|